दूसरी इकाई | पाठ ११ : समता की ओर

कविता - मुकुटधर पांडेय (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) कृति पूर्ण कीजिए :
शिशिर ऋतु में हुए परिवर्तन :
प्रकृति में :
प्रकृति की चमक समाप्त हो गई है और वह द्युतिहीन (कांतिहीन) हो गई है।
धरती पर :
पूरी धरती पर घनी कुंझटिका (धुंध और कोहरा) छाई हुई है।
Q2) जीवन शैली में अंतर स्पष्ट कीजिए : धनी बनाम दीन-दरिद्र
धनी वर्ग की जीवन शैली दीन-दरिद्र वर्ग की जीवन शैली
१. रात-दिन मौज-मस्ती, सुख और आनंद ही आनंद। १. शिशिर ऋतु की कड़कड़ाती ठंड और सारे दुखों को झेलना।
२. हलवा-पूड़ी, दूध-मलाई जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों का उपभोग। २. दो वक्त की सूखी रोटी और साधारण भाजी का भी भारी अभाव।
३. बहुमूल्य गरम ऊनी वस्त्र, दुशाले और हीटर की सुविधा। ३. फटे-चीथड़े कपड़ों में काँपते हुए रातें बिताना।
४. सुंदर, पक्के और सुरक्षित महलों व हवेलियों में निवास। ४. टूटी-फूटी झोपड़ियों में बिना छत के असहाय जीवन।
Q3) तालिका पूर्ण कीजिए : भारतीय ६ ऋतुएँ, अंग्रेजी माह व हिंदी माह
क्र. ऋतु अंग्रेजी माह हिंदी (भारतीय) माह
१. वसंत ऋतु मार्च – अप्रैल चैत्र – वैशाख
२. ग्रीष्म ऋतु मई – जून ज्येष्ठ – आषाढ़
३. वर्षा ऋतु जुलाई – अगस्त श्रावण – भाद्रपद
४. शरद ऋतु सितंबर – अक्टूबर आश्विन – कार्तिक
५. हेमंत ऋतु नवंबर – दिसंबर मार्गशीर्ष – पौष
६. शिशिर ऋतु जनवरी – फरवरी माघ – फाल्गुन
Q4) पद्य विश्लेषण :
निम्न मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए :
१. रचनाकार का नाम : मुकुटधर पांडेय
२. रचना की विधा : छायावादी सामाजिक कविता
३. पसंदीदा पंक्ति :
‘वे हैं हमारे कुटीर भाई, उनके दुख हरना होगा,
यदि समता की ओर बढ़ना है, तो हमको कुछ करना होगा।’

४. पसंदीदा होने का कारण : इन पंक्तियों में अमीर और गरीब के बीच की खाई को पाटने तथा समाज के शोषित वर्ग के प्रति करुणा और भ्रातृभाव का उदात्त संदेश दिया गया है।
५. रचना से प्राप्त संदेश / प्रेरणा : कवि यह संदेश देते हैं कि जब तक समाज में आर्थिक विषमता रहेगी, तब तक सच्चा सुख और शांति संभव नहीं है। संपन्न वर्ग का यह नैतिक दायित्व है कि वह दीन-दुखियों के आँसू पोंछे और समानता की स्थापना के लिए आगे आए।
Q5) अंतिम दो पंक्तियों से मिलने वाला संदेश लिखिए :
संदेश : कविता की अंतिम दो पंक्तियाँ हमें यह सीख देती हैं कि समाज के निर्धन, असहाय और उपेक्षित लोग भी हमारे अपने भाई-बंधु हैं। केवल भाषण देने या कानून बनाने से समानता नहीं आ सकती। यदि हम सचमुच देश में 'समता' और न्याय लाना चाहते हैं, तो हमें अपने स्तर पर आगे बढ़कर दीन-दुखियों के कष्ट दूर करने होंगे और समाज में बंधुत्व की भावना को व्यावहारिक रूप देना होगा।
Q6) उपयोजित लेखन : निबंध लेखन
‘विश्वबंधुता वर्तमान युग की माँग’ विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लिखिए :
निबंध : विश्वबंधुता वर्तमान युग की माँग

‘विश्वबंधुता’ का अर्थ है संपूर्ण संसार के प्राणियों को अपना भाई-बंधु समझना। हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति ने हमेशा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (पूरी पृथ्वी ही एक परिवार है) का अमर संदेश दिया है। आज के वैज्ञानिक युग में जब दूरियाँ मिट चुकी हैं और दुनिया एक वैश्विक गाँव (ग्लोबल विलेज) बन चुकी है, तब विश्वबंधुता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

आज विभिन्न राष्ट्रों के बीच युद्ध, आतंकवाद, हथियारों की होड़ और वैचारिक विद्वेष के कारण मानवता संकट में है। यदि तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो आधुनिक परमाणु अस्त्र पूरी पृथ्वी को क्षणभर में राख के ढेर में बदल देंगे। इस विनाशकारी खतरे से बचने का एकमात्र उपाय विश्वबंधुता, प्रेम और परस्पर सह-अस्तित्व है।

जब तक सभी देश संकीर्ण राष्ट्रीय सीमाओं और स्वार्थों से ऊपर उठकर एक-दूसरे के सुख-दुख में हाथ नहीं बँटाएंगे, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है। सचमुच, समूची मानव जाति के अस्तित्व और कल्याण के लिए विश्वबंधुता आज के युग की सबसे बड़ी और अनिवार्य माँग है।

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पाठ परिचय : समता की ओर (मुकुटधर पांडेय)

छायावाद के प्रवर्तक कवियों में अग्रणी मुकुटधर पांडेय द्वारा रचित 'समता की ओर' एक अत्यंत विचारोत्तेजक और प्रगतिशील कविता है। कवि ने शिशिर ऋतु की हाड़ कँपाने वाली ठंड के माध्यम से समाज में व्याप्त घोर आर्थिक विषमता, अमीरों के विलासी जीवन और गरीबों की दयनीय दशा का अत्यंत मार्मिक तुलनात्मक चित्रण किया है। कवि सभी मनुष्यों को एक ही ईश्वर की संतान मानते हुए समाज में समता, बंधुत्व और करुणा की स्थापना का आह्वान करते हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु एवं सामाजिक चेतना

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. शिशिर ऋतु में प्रकृति और मनुष्य जीवन में क्या परिवर्तन दिखाई देता है?

शिशिर ऋतु में कड़ाके की ठंड और पाले के कारण पेड़-पौधों के पत्ते झड़ जाते हैं, प्रकृति का सौंदर्य मुरझा जाता है तथा गरीब और बेसहारा लोग ठंड के मारे थर-थर काँपते हैं।

२. 'समता की ओर' कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?

समाज में अमीरी-गरीबी की खाई को पाटकर सभी मनुष्यों को समान अधिकार, सम्मान और साधन मिलना चाहिए। गरीबों को अपना भाई मानकर उनकी पीड़ा दूर करना ही सच्ची मानवता है।

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