दूसरी इकाई | पाठ ५ : ईमानदारी की प्रतिमूर्ति

संस्मरण - सुनील शास्त्री (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) संजाल पूर्ण कीजिए :
१. सादगी
२. ईमानदारी
↖ ↗
शास्त्री जी की स्वभावगत विशेषताएँ
↙ ↘
३. सरलता
४. दूसरों की सहायता करना
Q2) परिणाम लिखिए :
1. सुबह साढ़े पाँच-पौने छह बजे दरवाजा खटखटाने का परिणाम :
उत्तर : लेखक की नींद टूटी और वे बड़ी तेज आवाज में बोल उठे।
2. साठ पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से पैसे जमा करवाने का परिणाम :
उत्तर : पिता की यह बात सुनकर दोनों भाई वहाँ रुक नहीं सके और अपने कमरे में जाकर देर तक फूट-फूटकर रोते रहे।
Q3) प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए :
पाठ में प्रयुक्त गहनों के नाम :
१. चढ़ावे के पाँच ग्राम के सोने के गहने
↓
२. टीका
↓
३. नथुनी
↓
४. बिछिया
Q4) वर्ण पहेली से विलोम शब्दों की जोड़ियाँ ढूँढ़कर लिखिए :
क्र. शब्द विलोम शब्द
१. दुःख सुख
२. बुरा भला
३. प्रसन्न अप्रसन्न
४. सदुपयोग दुरुपयोग
Q5) भाव स्पष्ट कीजिए :
‘पर जो असल गहना है वह तो है’ इस वाक्य से अभिप्रेत भाव लिखिए :
उत्तर : सोने-चाँदी, हीरे और मोतियों के आभूषण केवल बाह्य शृंगार के साधन होते हैं। समय बीतने के साथ ये नष्ट हो सकते हैं या खो सकते हैं। स्त्री के लिए उसका असली और शाश्वत गहना उसका पति, परिवार का सम्मान, सद्गुण और चरित्र होता है। लाल बहादुर शास्त्री जी अपनी पत्नी ललिता जी को यही समझाते थे कि भौतिक गहनों से कहीं अधिक मूल्यवान जीवनसाथी का साथ और आपसी प्रेम होता है।
Q6) शास्त्री जी के स्वभावगत गुण :
कुरते के प्रसंग से शास्त्री जी के इन गुणों (स्वभाव) का पता चलता है :
१. सादगी और मितव्ययिता (कपड़े फटने पर भी रूमाल बनाना, व्यर्थ खर्च न करना)।
२. खादी और देश के प्रति अगाध प्रेम।
Q7) सूची तैयार कीजिए व शब्दार्थ :
1. पाठ में प्रयुक्त परिमाणों की सूची तैयार कीजिए :
उत्तर : ग्राम, किलोमीटर, पैसे, मिनट, बजे, सप्ताह, महीना।
2. ‘पर’ शब्द के दो अर्थ लिखकर उनका स्वतंत्र वाक्य में प्रयोग कीजिए :
(क) पर = पंख (डैना) : पक्षियों के सुंदर पर आकाश में उड़ने में सहायता करते हैं।
(ख) पर = परंतु (लेकिन) : रमेश ने दौड़ में बहुत प्रयास किया, पर वह प्रथम न आ सका।
Q8) अभिव्यक्ति :
‘सादा जीवन, उच्च विचार’ विषय पर अपने विचार लिखिए :
विचार : ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ भारतीय संस्कृति का मूल आदर्श है। इसका अर्थ है सादगीपूर्ण रहन-सहन और महान, उदात्त विचार रखना। जो व्यक्ति दिखावे और विलासिता से दूर रहकर सत्य, ईमानदारी और परोपकार को प्राथमिकता देता है, वह समाज में सदैव सम्मान का पात्र बनता है।

महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों ने इसी सिद्धांत को अपने जीवन में उतारकर विश्व में अपना नाम अमर किया। आज की उपभोक्तावादी संस्कृति में जहाँ लोग दिखावे की होड़ में कर्ज और तनाव में डूब रहे हैं, यह सिद्धांत हमें आंतरिक शांति, संतोष और सम्मानजनक जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
Q9) भाषा बिंदु - वाक्य शुद्धिकरण :
निम्नलिखित वाक्यों को व्याकरण के नियमों के अनुसार शुद्ध करके फिर से लिखिए :
क्र. अशुद्ध वाक्य शुद्ध वाक्य
१. करामत अली गाय अपनी घर लाई। करामत अली गाय अपने घर ले आए।
२. उसने गाय की पीठ पर डंडे बरसाने नहीं चाहिए थी। उसे गाय की पीठ पर डंडे नहीं बरसाने चाहिए थे।
३. करामत अली ने रमजानी पर गाय के देखभाल का जिम्मेदारी सौंपी। करामत अली ने रमजानी पर गाय की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी।
४. आचार्य अपने शिष्यों से मिलना चाहता था। आचार्य अपने शिष्यों से मिलना चाहते थे।
५. घर में तख्ता रखे जाने की आवाज आता है। घर में तख्ता रखे जाने की आवाज आती है।
६. लक्ष्मी की एक झब्बेदार पूँछ था। लक्ष्मी की एक झब्बेदार पूँछ थी।
७. रंगीन फूल की माला बहोत सुंदर लग रही थी। रंगीन फूलों की माला बहुत सुंदर लग रही थी।
८. लड़का, पिता जी और माँ बाजार को गई। लड़का, पिताजी और माँ बाजार गए।
९. बरसों बाद पंडित जी को मित्र का दर्शन हुआ। बरसों बाद पंडित जी को मित्र के दर्शन हुए।
१०. गोवा के बीच पर घूमने में बड़ी मजा आई। गोवा के बीच पर घूमने में बड़ा मजा आया।
११. सामने शेर देखकर यात्री का प्राण मानो मुरझा गया। सामने शेर देखकर यात्री के प्राण मानो मुरझा गए।
१२. करामत अली के आँखों में आँसू उतर आई। करामत अली की आँखों में आँसू उतर आए।
१३. मैं मेरे देश को प्रेम करता हूँ। मैं अपने देश से प्यार करता हूँ।
Q10) उपयोजित लेखन : कहानी लेखन
मुद्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए : गाँव में लड़कियाँ - पढ़ने में होशियार - पानी का अभाव - दूर से पानी लाना - पढ़ाई में बाधा - समस्या पर चर्चा - गाँववालों के सहयोग से कुआँ खोदना - सफलता
कहानी का शीर्षक : एकता और सूझबूझ का फल

राघोपुर एक दूरस्थ और पहाड़ी गाँव था। गाँव की सभी लड़कियाँ पढ़ने-लिखने में बहुत होशियार और परिश्रमी थीं। गाँव में एक माध्यमिक विद्यालय था जहाँ वे रोज पढ़ने जाती थीं। परंतु इस गाँव में पीने के पानी का भारी संकट था।

गाँव में कोई कुआँ या हैंडपंप नहीं था। लड़कियों को प्रतिदिन दो किलोमीटर दूर दूसरे गाँव से सिर पर घड़े रखकर पानी लाना पड़ता था। इस भारी परिश्रम और समय के नुकसान के कारण लड़कियों की पढ़ाई में रुकावट आती थी और वे अक्सर देर से विद्यालय पहुँचती थीं।

एक दिन विद्यालय की होशियार छात्रा मीना ने अपनी सभी सहेलियों को इकट्ठा किया और कहा, “सखियो! प्रतिदिन रोने से हमारी समस्या हल नहीं होगी। क्यों न हम स्वयं अपने गाँव में श्रमदान करके कुआँ खोदें?” सभी लड़कियों ने उत्साह से हामी भरी। उन्होंने पढ़ाई के बाद का खाली समय कुआँ खोदने में लगाना शुरू किया।

जब गाँव के बुजुर्गों और युवकों ने छोटी-छोटी बच्चियों को कुदाल और फावड़ा चलाते देखा, तो उन्हें अपनी लापरवाही पर लज्जा आई। गाँव के सभी लोग आगे आए और कुआँ खोदने के काम में जुट गए। कुछ ही दिनों की कड़ी मेहनत से जमीन से मीठे पानी का फव्वारा फूट पड़ा! अब गाँव में पानी की भरपूर सुविधा हो गई और लड़कियाँ मन लगाकर अपनी पढ़ाई करने लगीं।

सीख : जब सूझबूझ और अटूट एकता के साथ प्रयास किया जाए, तो बड़े-से-बड़ा संकट भी दूर हो जाता है।
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पाठ परिचय : ईमानदारी की प्रतिमूर्ति (सुनील शास्त्री)

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत-रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी के सुपुत्र सुनील शास्त्री द्वारा लिखित संस्मरण 'ईमानदारी की प्रतिमूर्ति' में शास्त्री जी की सादगी, शुचिता, कर्तव्यनिष्ठा और बेमिसाल ईमानदारी का अत्यंत आत्मीय और हृदयस्पर्शी संस्मरण प्रस्तुत किया गया है। देश के सर्वोच्च पद पर रहते हुए भी सरकारी संसाधनों का निजी उपयोग न करना और उच्च नैतिक मूल्यों पर अडिग रहना शास्त्री जी के महान व्यक्तित्व को दर्शाता है।

महत्वपूर्ण बिंदु एवं जीवन-मूल्य

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. शास्त्री जी की बात सुनकर उनके बेटे पश्चात्ताप से क्यों रो पड़े?

जब बेटों को पता चला कि उनके द्वारा चौदह किलोमीटर गाड़ी चलाने का खर्च शास्त्री जी ने अपने निजी वेतन से कटवा कर सरकारी खाते में जमा कराया है, तो उन्हें अपनी गलती का गहरा अहसास हुआ और वे पश्चात्ताप से रो पड़े।

२. 'सादा जीवन, उच्च विचार' के आदर्श प्रतीक कौन हैं?

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी 'सादा जीवन, उच्च विचार' के जीवंत प्रतीक थे। उनका पूरा जीवन सादगी, ईमानदारी और राष्ट्र-सेवा को समर्पित था।

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