पहली इकाई | पाठ ६ : गिरिधर नागर

मध्ययुगीन काव्य - संत मीराबाई (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) सूचनानुसार कृतियाँ कीजिए: संजाल पूर्ण कीजिए: (श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य की विशेषताएँ)
उत्तर :
सिर पर मोरपंख का मुकुट धारण करने वाले।
गोवर्धन पर्वत को उँगली पर उठाने वाले (गिरिधर)।
↖ ↗
श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य की विशेषताएँ
↙ ↘
गायों के पालक और रक्षक (गोपाल)।
मीराबाई के एकमात्र आराध्य और स्वामी (पति)।
Q2) प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए: (मीराबाई की कृष्ण-भक्ति साधना का क्रम)
उत्तर :
१. कुल की मर्यादा और राजसी वैभव का त्याग करना।
↓
२. संतों के संग बैठकर लोक-लाज खोना और ईश्वर-भजन में लीन होना।
↓
३. अपने अश्रुओं के जल से सींच-सींच कर कृष्ण-प्रेम की बेल बोना।
↓
४. प्रेम-बेल के फैलने पर उस पर आनंद रूपी फल का लगना।
Q3) इस अर्थ में आए मध्ययुगीन शब्द लिखिए:
उत्तर :
आधुनिक अर्थ कविता में प्रयुक्त शब्द
1. दासी चेरी
2. साजन पति
3. बार-बार बेर-बेर
4. आकाश अंबर
Q4) पदों में प्रयुक्त कन्हैया के चार नाम लिखिए:
उत्तर :
१. गिरिधर
२. गोपाल
३. लाल
४. सांवरो
Q5) दूसरे पद का सरल भावार्थ लिखिए:
सरल अर्थ :
"अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी।
अब त बेलि फैलि गई, आणंद फल होई॥"

भावार्थ: संत मीराबाई कहती हैं कि मैंने अपने आंसुओं के पावन जल से सींच-सींच कर प्रभु श्रीकृष्ण के अनन्य प्रेम की पावन बेल बोई थी। अब वह प्रेम-बेल चारों ओर फैल चुकी है और उस पर भक्ति का परम आनंद रूपी अमृत फल लगने लगा है। सांसारिक लोगों को मोह-माया और व्यर्थ के प्रपंचों में फँसा देखकर मुझे रोना आता है, परंतु प्रभु भक्तों को देखकर मेरा हृदय अत्यंत आनंदित हो उठता है। हे गिरधर लाल! मैं तो आपकी दासी हूँ, अब आप ही मेरा उद्धार कीजिए।

Q6) भाषा बिंदु (व्याकरण): दिए गए कारक चिह्नों का प्रयोग करके वाक्य बनाइए और उनके कारक पहचानिए:
उत्तर :
कारक चिह्न निर्मित वाक्य कारक भेद
ने मीराबाई ने कृष्ण को अपना सर्वस्व माना। कर्ता कारक
को अध्यापक ने छात्र को पुस्तक दी। कर्म कारक
से (साधन) उसने कलम से पत्र लिखा। करण कारक
के लिए सैनिक देश के लिए बलिदान देते हैं। संप्रदान कारक
से (अलग होना) पेड़ से पत्ता गिरा। अपादान कारक
का / के / की यह मीरा की भक्ति भावना है। संबंध कारक
में / पर कमल जल में खिलता है। अधिकरण कारक
हे / अरे हे प्रभु! सबका कल्याण करो। संबोधन कारक
Q7) उपयोजित लेखन (कहानी लेखन): दिए गए शब्दों के आधार पर कहानी लिखकर उचित शीर्षक एवं सीख लिखिए: [अलमारी, गिलहरी, चावल के पापड़, छोटा बच्चा]
उत्तर :

शीर्षक : नन्हीं गिलहरी और दयालु चिंटू

एक गाँव में चिंटू नाम का एक संवेदनशील छोटा बच्चा रहता था। एक दोपहर जब चिंटू आँगन में खेल रहा था, उसने देखा कि दो कौए एक घायल गिलहरी के बच्चे पर लगातार चोंच मार रहे थे और वह नन्हीं गिलहरी दर्द से चीं-चीं कर रही थी।

चिंटू ने तुरंत पत्थर उठाकर कौओं को भगाया और अपने रूमाल में लपेटकर घायल गिलहरी को कमरे में ले आया। उसने रुई से गिलहरी के घाव साफ किए और दवा लगाई। मेज पर धूप में सुखाने के लिए रखे चावल के पापड़ में से एक छोटा टुकड़ा चिंटू ने गिलहरी के सामने रखा। भूखी गिलहरी ने अपने दोनों पंजों में पापड़ पकड़कर कुतर-कुतर कर खाया।

चिंटू ने अपनी किताबों की खुली अलमारी के एक सुरक्षित खाने में मुलायम तौलिया बिछाकर गिलहरी का सुंदर बसेरा बना दिया। कुछ ही दिनों में चिंटू की ममता और सेवा से गिलहरी पूरी तरह स्वस्थ हो गई और बाहर पेड़ पर फुदकने लगी।

सीख: बेजुबान और घायल पशु-पक्षियों पर दया करना सबसे बड़ा मानवीय धर्म है।

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पाठ परिचय : गिरिधर नागर (संत मीराबाई)

भक्तिकाल की अनन्य श्रीकृष्ण भक्त कवयित्री संत मीराबाई द्वारा रचित 'गिरिधर नागर' में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अगाध प्रेम, समर्पण और अनन्य भक्ति की अभिव्यक्ति हुई है। मीराबाई ने संसार के सभी बंधनों, लोक-लाज और राजसी वैभव को त्यागकर केवल गिरिधर गोपाल को अपना पति व सर्वस्व स्वीकार किया है।

काव्य के प्रमुख भक्तिभाव एवं विचार

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. मीराबाई ने श्रीकृष्ण के कौन-से रूप की वंदना की है?

मीराबाई ने सिर पर मोरमुकुट धारण करने वाले और गोवर्धन पर्वत उठाने वाले 'गिरिधर गोपाल' रूप की आराधना की है।

२. कारक के कितने भेद होते हैं?

हिंदी व्याकरण में कारक के ८ भेद होते हैं: कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन कारक।

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