| आधुनिक अर्थ | कविता में प्रयुक्त शब्द |
|---|---|
| 1. दासी | चेरी |
| 2. साजन | पति |
| 3. बार-बार | बेर-बेर |
| 4. आकाश | अंबर |
भावार्थ: संत मीराबाई कहती हैं कि मैंने अपने आंसुओं के पावन जल से सींच-सींच कर प्रभु श्रीकृष्ण के अनन्य प्रेम की पावन बेल बोई थी। अब वह प्रेम-बेल चारों ओर फैल चुकी है और उस पर भक्ति का परम आनंद रूपी अमृत फल लगने लगा है। सांसारिक लोगों को मोह-माया और व्यर्थ के प्रपंचों में फँसा देखकर मुझे रोना आता है, परंतु प्रभु भक्तों को देखकर मेरा हृदय अत्यंत आनंदित हो उठता है। हे गिरधर लाल! मैं तो आपकी दासी हूँ, अब आप ही मेरा उद्धार कीजिए।
| कारक चिह्न | निर्मित वाक्य | कारक भेद |
|---|---|---|
| ने | मीराबाई ने कृष्ण को अपना सर्वस्व माना। | कर्ता कारक |
| को | अध्यापक ने छात्र को पुस्तक दी। | कर्म कारक |
| से (साधन) | उसने कलम से पत्र लिखा। | करण कारक |
| के लिए | सैनिक देश के लिए बलिदान देते हैं। | संप्रदान कारक |
| से (अलग होना) | पेड़ से पत्ता गिरा। | अपादान कारक |
| का / के / की | यह मीरा की भक्ति भावना है। | संबंध कारक |
| में / पर | कमल जल में खिलता है। | अधिकरण कारक |
| हे / अरे | हे प्रभु! सबका कल्याण करो। | संबोधन कारक |
एक गाँव में चिंटू नाम का एक संवेदनशील छोटा बच्चा रहता था। एक दोपहर जब चिंटू आँगन में खेल रहा था, उसने देखा कि दो कौए एक घायल गिलहरी के बच्चे पर लगातार चोंच मार रहे थे और वह नन्हीं गिलहरी दर्द से चीं-चीं कर रही थी।
चिंटू ने तुरंत पत्थर उठाकर कौओं को भगाया और अपने रूमाल में लपेटकर घायल गिलहरी को कमरे में ले आया। उसने रुई से गिलहरी के घाव साफ किए और दवा लगाई। मेज पर धूप में सुखाने के लिए रखे चावल के पापड़ में से एक छोटा टुकड़ा चिंटू ने गिलहरी के सामने रखा। भूखी गिलहरी ने अपने दोनों पंजों में पापड़ पकड़कर कुतर-कुतर कर खाया।
चिंटू ने अपनी किताबों की खुली अलमारी के एक सुरक्षित खाने में मुलायम तौलिया बिछाकर गिलहरी का सुंदर बसेरा बना दिया। कुछ ही दिनों में चिंटू की ममता और सेवा से गिलहरी पूरी तरह स्वस्थ हो गई और बाहर पेड़ पर फुदकने लगी।
सीख: बेजुबान और घायल पशु-पक्षियों पर दया करना सबसे बड़ा मानवीय धर्म है।
भक्तिकाल की अनन्य श्रीकृष्ण भक्त कवयित्री संत मीराबाई द्वारा रचित 'गिरिधर नागर' में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अगाध प्रेम, समर्पण और अनन्य भक्ति की अभिव्यक्ति हुई है। मीराबाई ने संसार के सभी बंधनों, लोक-लाज और राजसी वैभव को त्यागकर केवल गिरिधर गोपाल को अपना पति व सर्वस्व स्वीकार किया है।
मीराबाई ने सिर पर मोरमुकुट धारण करने वाले और गोवर्धन पर्वत उठाने वाले 'गिरिधर गोपाल' रूप की आराधना की है।
हिंदी व्याकरण में कारक के ८ भेद होते हैं: कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन कारक।