Q1)
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए: प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए: (मनुष्य के संकुचित होते दायरे का कारण)
उत्तर :
१. शहरों में ऊँचे-ऊँचे कंक्रीट के मकानों और बहुमंजिला इमारतों का जाल बिछना।
↓
२. प्रकृति, खुले आकाश और ताजी हवा से मनुष्य का संपर्क टूट जाना।
↓
३. संकीर्ण फ्लैटों में बंद रहकर मनुष्य की सोच और आत्मीयता का भी सीमित हो जाना।
↓
४. आत्म-केंद्रित होकर केवल स्वार्थ और भौतिक सुख-सुविधाओं तक सिमट जाना।
Q2)
कृति पूर्ण कीजिए: बड़े मकानों में रहने वाले लोगों की स्थिति:
उत्तर :
वे एक संकीर्ण डिब्बे जैसी दुनिया में कैद होकर रह जाते हैं।
उन्हें खुला आकाश और खिली धूप देखने को भी तरसना पड़ता है।
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बड़े मकानों में रहने वाले लोगों की स्थिति
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↘
भौतिक सुख होने पर भी मानसिक शांति व आत्मीयता का अभाव रहता है।
पड़ोसी कौन है, इसकी भी उन्हें कोई खबर नहीं होती।
Q3)
आकृति में लिखिए: खुले आकाश और प्रकृति का मानव जीवन पर प्रभाव:
उत्तर :
- विचारों की व्यापकता: खुला आकाश मनुष्य की सोच और दृष्टिकोण को उदार तथा विशाल बनाता है।
- शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य: ताजी हवा, धूप और हरियाली से मन तनावमुक्त और शरीर स्फूर्तिवान रहता है।
- सर्जनशीलता: प्रकृति के खुले सान्निध्य में नई सोच, कला और साहित्य के सृजन की प्रेरणा मिलती है।
- आत्मिक शांति: प्रकृति से जुड़कर मनुष्य को असीम आंतरिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
Q4)
भाषा बिंदु (व्याकरण): संधि विच्छेद कीजिए, संधि शब्द लिखिए और संधि का भेद बताइए:
उत्तर :
| संधि शब्द |
संधि विच्छेद |
संधि का भेद |
| सज्जन |
सत् + जन |
व्यंजन संधि |
| नमस्ते |
नमः + ते |
विसर्ग संधि |
| स्वागत |
सु + आगत |
स्वर संधि (यण) |
| दिग्दर्शक |
दिक् + दर्शक |
व्यंजन संधि |
| यद्यपि |
यदि + अपि |
स्वर संधि (यण) |
| दुस्साहस |
दुः + साहस |
विसर्ग संधि |
| दुर्लभ |
दुः + लभ |
विसर्ग संधि |
| महात्मा |
महा + आत्मा |
स्वर संधि (दीर्घ) |
| अनासक्त |
अन् + आसक्त |
स्वर संधि |
| अंतश्चेतना |
अंतः + चेतना |
विसर्ग संधि |
| संतोष |
सम् + तोष |
व्यंजन संधि |
| सदैव |
सदा + एव |
स्वर संधि (वृद्धि) |
पाठ परिचय : खुला आकाश (डायरी - कुँवर नारायण)
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार कुँवर नारायण द्वारा लिखित 'खुला आकाश' उनकी डायरी विधा का उत्कृष्ट अंश है। आधुनिक शहरीकरण में सीमेंट के जंगलों में घिरे मनुष्य का प्रकृति और खुले आकाश से कट जाने की व्यथा को लेखक ने बड़े ही दार्शनिक और विचारोत्तेजक अंदाज में प्रस्तुत किया है।
पाठ के प्रमुख विचार एवं संवेदनाएँ
- शहरीकरण का दुष्परिणाम : कंक्रीट के मकानों में बंद रहकर मनुष्य की संवेदनशीलता का सीमित होना।
- प्रकृति का सान्निध्य : खुले आकाश और खुली हवा में ही मनुष्य की चेतना का सच्चा विकास संभव है।
- दार्शनिक दृष्टिकोण : भौतिक सुखों से आगे बढ़कर आत्मिक स्वतंत्रता और पर्यावरण संतुलन की आवश्यकता।
बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
१. 'खुला आकाश' पाठ की साहित्यिक विधा कौन-सी है?
यह पाठ 'डायरी' साहित्यिक विधा के अंतर्गत लिखा गया है, जिसमें लेखक अपने दैनिक जीवन के चिंतन को दर्ज करते हैं।
२. संधि के कितने भेद होते हैं?
हिंदी व्याकरण में संधि के मुख्य ३ भेद होते हैं: १. स्वर संधि २. व्यंजन संधि ३. विसर्ग संधि।
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