| मूल शब्द | प्रत्यय | प्रत्ययसाधित शब्द |
|---|---|---|
| मानव | ता | मानवता |
| कुशल | ता | कुशलता |
| उत्कृष्ट | ता | उत्कृष्टता |
| एक | ता | एकता |
| अंग | मुहावरा | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|---|
| १. आँख | (क) आँखों से ओझल होना | गायब / अदृश्य हो जाना | उड़ान भरते ही हवाई जहाज बादलों के पीछे आँखों से ओझल हो गया। |
| (ख) आँखें भर आना | आँखों में आँसू आना | बेटी की विदाई के समय माता-पिता की आँखें भर आईं। | |
| २. मुँह | (क) मुँह मोड़ लेना | उपेक्षा करना / ध्यान न देना | संकट के समय सच्चे मित्र कभी अपनों से मुँह नहीं मोड़ते। |
| (ख) मुँह की खाना | बुरी तरह पराजित होना | कारगिल युद्ध में शत्रु सेना को मुँह की खानी पड़ी। | |
| ३. दाँत | (क) दाँत पीसना | अत्यधिक क्रोधित होना | अपराधी की धृष्टता देखकर पुलिस अधिकारी दाँत पीसने लगे। |
| (ख) दाँत काटी रोटी होना | गहरी व पक्की मित्रता होना | कृष्ण और सुदामा में दाँत काटी रोटी की गहरी मित्रता थी। | |
| ४. हाथ | (क) हाथ का मैल होना | अत्यंत तुच्छ वस्तु समझना | दानी सेठ के लिए निर्धनों को दान देना हाथ का मैल था। |
| (ख) हाथ में आना | काबू या नियंत्रण में आना | कड़ी मशक्कत के बाद शातिर चोर पुलिस के हाथ में आ ही गया। | |
| ५. हृदय | (क) हृदय उछलना | अत्यंत प्रसन्नता से भर जाना | पुत्र को सेना में अधिकारी पद पर देखकर माँ का हृदय उछल पड़ा। |
| (ख) हृदय पसीजना | मन में दया या करुणा जागना | अनाथ बच्चे का रुदन सुनकर पत्थरदिल व्यक्ति का भी हृदय पसीज गया। |
दिनांक : १५ नवंबर २०२६
प्रिय मित्र नरेश,
सस्नेह नमस्ते।
आज ही दैनिक समाचार पत्र में पढ़ा कि जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में तुम्हारे विज्ञान मॉडल को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। यह सुखद समाचार पढ़कर मेरा मन आनंद से भर गया। इस गौरवमयी उपलब्धि के लिए तुम्हें मेरी और मेरे पूरे परिवार की ओर से हार्दिक बधाई!
मुझे भली-भाँति याद है कि तुम अपने मॉडल ‘सौर ऊर्जा संचालित जल शोधन यंत्र’ को बनाने के लिए कितने महीनों से लगन और परिश्रम के साथ जुटे हुए थे। तुम्हारी इसी निष्ठा और वैज्ञानिक सोच का यह सुखद परिणाम है। तुमने अपने विद्यालय और पूरे नगर का नाम रोशन किया है।
मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाली राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में भी तुम इसी प्रकार उत्कृष्ट सफलता प्राप्त करोगे। माताजी एवं पिताजी को मेरा सादर प्रणाम और छोटी बहन को ढेर सारा प्यार।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
कमल शर्मा
४५, कृष्णा विला, महात्मा गांधी मार्ग,
औरंगाबाद - ४३१००७
ईमेल : kamal.sharma@gmail.com
गांधीवादी चिंतक और राष्ट्रभाषा प्रचारक काका कालेलकर द्वारा अपनी बहन सरोज को लिखे गए इस ऐतिहासिक पत्र में 'महिला आश्रम' की स्थापना, नियम और उसकी कार्यप्रणाली का अत्यंत सुव्यवस्थित और व्यावहारिक प्रारूप प्रस्तुत किया गया है। काकाजी चाहते थे कि यह आश्रम स्त्रियों को पूर्णतः स्वावलंबी, स्वाभिमानी, संवेदनशील और सादगीपूर्ण जीवन जीने का आदर्श मंच प्रदान करे, जहाँ किसी भी प्रकार का आडंबर या परावलंबन न हो।
गुलदाउदी का फूल जाड़े (शीत ऋतु) के मौसम में खिलता है। इसकी कलियाँ बहुत धीरे-धीरे एक-एक पंखुड़ी करके खिलती हैं और यह फूल लंबे समय तक अपनी ताजगी बनाए रखता है।
काकाजी को खगोलशास्त्र और प्रकृति-दर्शन में गहरी रुचि थी। रात के समय आकाश के तारों और नक्षत्रों के सटीक नक्शे बनाने के लिए उन्होंने कंपास बॉक्स मँगवाया था।