दूसरी इकाई | पाठ ८ : अपनी गंध नहीं बेचूँगा

गीत - बालकवि 'बैरागी' (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) कृति पूर्ण कीजिए :
१. गंध (अपनी सुगंध)
२. सौगंध (अपनी शपथ / संस्कार)
↖ ↗
फूल बेचना नहीं चाहता
↙ ↘
३. अनुबंध (स्वाभिमान का बंधन)
४. प्रतिबंध (अपने नियम)
Q2) संक्षेप में उत्तर लिखिए :
1. फूल को बिक जाने से भी बेहतर लगता है :
उत्तर : मर जाना।
2. फूल के अनुसार उसे तोड़ने का पहला अधिकार इन्हें है :
उत्तर : डाली, कोंपल और काँटों को।
Q3) कृति पूर्ण कीजिए :
अंत पता होने पर भी फूल की अभिलाषा :
(१) मरने के पहले एक-एक के घर जाना (खुशियाँ बाँटना)
(२) भूल-चूक के लिए सबसे माफी माँगना
Q4) सूची बनाइए :
इनका फूल के जीवन से सीधा संबंध है :
१. उपवन
२. डाली
३. कोंपल
४. काँटे
Q5) कारण लिखिए :
1. फूल अपनी सौगंध नहीं बेचेगा, क्योंकि :
उत्तर : अपनी गंध न बेचने की सौगंध फूल का संस्कार और स्वाभिमान बन चुकी है, जिसे वह किसी भी मूल्य पर छोड़ना नहीं चाहता।
2. फूल को मौसम से कुछ लेना-देना नहीं है, क्योंकि :
उत्तर : उसे अपने अस्तित्व और सुगंध के बदले किसी से कुछ भी पाने की लालसा नहीं है, चाहे अनुकूल मौसम हो या प्रतिकूल।
Q6) अर्थ स्पष्ट कीजिए :
‘दाता होगा तो दे देगा, खाता होगा तो खाएगा’ इस पंक्ति से स्पष्ट होने वाला अर्थ लिखिए :
उत्तर : इस पंक्ति के माध्यम से कवि बालकवि बैरागी जी यह स्पष्ट करते हैं कि स्वाभिमानी फूल को सांसारिक लाभ-हानि या किसी की दया की परवाह नहीं है। प्रकृति अथवा ईश्वर जिसे जो देना चाहेगा वह दे देगा और जिसे जो भोगना होगा वह भोगेगा। फूल तो निष्काम भाव से अपनी सुगंध चारों ओर बिखेरता है, उसका ध्येय केवल निस्वार्थ भाव से अपना कर्तव्य निभाना और अपने स्वाभिमान की रक्षा करना है।
Q7) पद्य विश्लेषण :
निम्न मुद्दों के आधार पर कविता का पद्य विश्लेषण कीजिए :
१. रचनाकार का नाम : बालकवि 'बैरागी' (नंदरामदास बैरागी)
२. रचना की विधा : प्रेरणादायक गीत
३. पसंदीदा पंक्ति :
‘चाहे सभी सुमन बिक जाएँ, चाहे ये उपवन बिक जाएँ,
चाहे सौ फागुन बिक जाएँ, पर मैं गंध नहीं बेचूँगा।’

४. पसंदीदा होने का कारण : इन पंक्तियों में फूल के माध्यम से मनुष्य के अडिग स्वाभिमान और आत्मसम्मान को सर्वोपरि दर्शाया गया है। चाहे कैसी भी विपत्ति आए या पूरा संसार बिक जाए, पर अपने आत्मसम्मान का सौदा कभी नहीं करना चाहिए।
५. रचना से प्राप्त संदेश / प्रेरणा : प्रस्तुत गीत से यह अमर संदेश मिलता है कि स्वाभिमान मनुष्य की सबसे अमूल्य धरोहर है। हमें धन, पद या लालच के सामने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए और हर हाल में स्वाभिमानपूर्वक जीना चाहिए।
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पाठ परिचय : अपनी गंध नहीं बेचूँगा (बालकवि 'बैरागी')

सुप्रसिद्ध गीतकार बालकवि 'बैरागी' द्वारा रचित 'अपनी गंध नहीं बेचूँगा' स्वाभिमान, निष्ठा और नैतिक सिद्धांतों की रक्षा का एक अत्यंत ओजस्वी और प्रेरक गीत है। कवि ने बगीचे के एक नन्हे से फूल के माध्यम से मानवीय गरिमा और आत्मसम्मान को स्वर दिया है। फूल किसी भी सांसारिक वैभव, धन-दौलत या लालच के बदले अपनी स्वाभाविक सुगंध बेचने से स्पष्ट इनकार कर देता है और अपनी डाल पर ही मुरझा जाना श्रेयस्कर समझता है।

महत्वपूर्ण बिंदु एवं नैतिक प्रेरणा

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. फूल को बिक जाने की अपेक्षा क्या अधिक स्वीकार्य है?

फूल को किसी के हाथों या बाजार में अपना स्वाभिमान बेचकर बिकने की अपेक्षा अपनी ही जन्मदाता डाल पर चुपचाप मुरझाकर माटी में मिल जाना अधिक गौरवपूर्ण लगता है।

२. इस कविता का मुख्य जीवन-संदेश क्या है?

मनुष्य को जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयों और प्रलोभनों का सामना करना पड़े, उसे कभी भी अपने स्वाभिमान, सत्य और आत्मसम्मान का सौदा नहीं करना चाहिए।

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