दूसरी इकाई | पाठ ११ : स्‍वतंत्रता गान

कविता (प्रेरणा गीत) - गोपालसिंह नेपाली (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) पाठ के आँगन में: उचित जोड़ियाँ मिलाइए:
स्तंभ 'अ' स्तंभ 'आ' (उत्तर)
१. अतीत कल्पना
२. पुनीत भावना
३. अनंत साधना
४. विनीत प्रार्थना
Q2) संजाल पूर्ण कीजिए: इन प्रतिकूल परिस्थितियों में भी दीया बुझना नहीं चाहिए:
१. घोर अंधकार में
२. तैरती हुई नाव में
↑ ↑
इन प्रतिकूल परिस्थितियों में भी दीया बुझना नहीं चाहिए
↓ ↓
३. तेज गति से बहती हवा में
४. पानी के तेज बहाव में
Q3) स्वमत अभिव्यक्ति: 'यह स्वतंत्र भावना का स्वतंत्र गान है' - इस पंक्ति में आई कवि की भावना स्पष्ट कीजिए:
उत्तर :

प्रस्तुत पंक्ति में कवि गोपालसिंह नेपाली ने भारतीयों की स्वतंत्रता, स्वाभिमान और संप्रभुता के प्रति अगाध निष्ठा व्यक्त की है। भारत ने सैकड़ों वर्षों की लंबी परतंत्रता, दमन और अनगिनत अमर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान के पश्चात स्वतंत्रता रूपी यह पावन दीपक प्राप्त किया है। यह किसी की कृपा या भिक्षा से नहीं, बल्कि भारतीयों की अनंत साधना और त्याग का पावन फल है।

कवि कहते हैं कि यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, अपितु हर स्वतंत्र भारतीय नागरिक के अंतर्मन की पावन भावना और राष्ट्रीय अस्मिता का गौरवशाली उद्घोष है। चाहे देश में शांति हो या अशांति, सुख हो या विपत्ति, आंतरिक मतभेद हों या राजनीतिक उठापटक, किसी भी क्षुद्र लाभ अथवा हार-जीत के कारण हमें अपनी स्वतंत्रता के इस दीपक को कभी बुझने नहीं देना चाहिए। इसकी अखंड रक्षा करना प्रत्येक देशवासी का सर्वोच्च राष्ट्रीय कर्तव्य है।

पद्यांश भावार्थ (सरल अर्थ)

Q4) निम्नलिखित पद्यांशों का सरल भावार्थ लिखिए:
(१) "घोर अंधकार हो, चल रही बयार हो... यह स्वदेश का दिया, न प्राण के समान है।"
भावार्थ :
कवि कहते हैं कि चाहे चारों ओर घोर अंधकार फैला हो और तूफानी हवा तेजी से बह रही हो, फिर भी प्रत्येक भारतीय के हृदय-द्वार पर जलता हुआ यह आजादी का दीपक कभी बुझना नहीं चाहिए। यह दीपक रात का दीया है, जिसने सदियों की गुलामी के अंधकार को समाप्त कर स्वतंत्रता का नया प्रभात ला दिया है। यह दीपक शक्ति और भक्ति से परिपूर्ण है। भले ही गंगा की तेज लहरों में नाव डगमगा रही हो, किंतु हमारे प्राणों के समान प्रिय इस स्वतंत्रता के दीए को हमें हर कीमत पर प्रज्वलित रखना है।
(२) "यह अतीत कल्पना, यह विनीत प्रार्थना... तीर पर, कछार पर, यह दिया बुझे नहीं।"
भावार्थ :
कवि स्पष्ट करते हैं कि यह स्वतंत्रता हमारे पूर्वजों की अतीत की कल्पना और अनंत तपस्या का मधुर फल है। यह हमारी पवित्र भावना और ईश्वर से की गई विनीत प्रार्थना का प्रतिफल है। देश में चाहे शांति हो या अशांति का दौर हो, युद्ध की परिस्थिति हो या संधि-वार्ता का समय हो, अथवा देश में कोई क्रांति क्यों न हो रही हो; नदी के तीर (किनारे) से लेकर कछार तक यह पावन ज्योति कभी मद्धिम नहीं पड़नी चाहिए।
(३) "तीन चार फूल हैं, आस-पास धूल है... यह किसी शहीद का पुण्य प्राण दान है।"
भावार्थ :
कवि कहते हैं कि स्वतंत्रता के इस पावन दीपक के आस-पास भले ही अभावों की धूल हो, काँटेदार बबूल के पेड़ हों और रूखी घास हो; फिर भी वीर शहीदों की समाधि और मजार पर जलने वाला यह दीपक कभी बुझना नहीं चाहिए। यह केवल मिट्टी का दीया नहीं, अपितु वतन पर न्योछावर होने वाले अमर शहीदों के प्राणों का पावन दान है। हमें उनके इस पावन बलिदान का सदैव सम्मान करना चाहिए।
Q5) पद्य-विश्लेषण के आधार पर कृतियाँ कीजिए:
मुद्दे उत्तर
(१) रचनाकार का नाम गोपालसिंह नेपाली
(२) रचना की विधा प्रेरणा गीत (राष्ट्रीय कविता)
(३) पसंदीदा पंक्ति "विषम परिस्थिति बने, सुराही-सा दिल ढले / तीर पर, कछार पर, यह दिया बुझे नहीं।"
(४) पंक्ति पसंद आने का कारण यह पंक्ति विपरीत एवं कठिन परिस्थितियों में भी घबराए बिना राष्ट्र की स्वतंत्रता की रक्षा करने का अटूट संकल्प सिखाती है।
(५) रचना से प्राप्त प्रेरणा देश की स्वतंत्रता की रक्षा अपने प्राणों से भी बढ़कर करना, देशप्रेम की अखंड भावना बनाए रखना और अमर शहीदों के बलिदान का सदैव आदर करना।
Q6) कल्पना पल्लवन: 'विश्व स्तर पर भारत की पहचान निराली है' - स्पष्ट कीजिए:
उत्तर :

भारत विश्व का सबसे प्राचीन, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और विशालतम लोकतांत्रिक राष्ट्र है। यहाँ विभिन्न धर्मों, जातियों, भाषाओं और रीति-रिवाजों के लोग 'अनेकता में एकता' के पावन सूत्र में बँधकर प्रेम और सद्भाव से रहते हैं। हमारी यह 'सर्वधर्म समभाव' और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (समूचा विश्व एक परिवार है) की उदात्त भावना समूचे विश्व में भारत को एक अद्वितीय और गौरवपूर्ण पहचान प्रदान करती है।

आज ज्ञान-विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान (इसरो), सूचना प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और योग-आयुर्वेद के क्षेत्र में भारत का परचम पूरे विश्व में लहरा रहा है। विश्व स्तर पर शांति, अहिंसा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत एक सशक्त मार्गदर्शक बनकर उभरा है। इसीलिए कहा गया है — "सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा!"

भाषा बिंदु एवं व्याकरण अध्ययन

Q7) व्याकरण चार्ट: शब्द भेद (विकारी एवं अविकारी तालिका):
संज्ञा सर्वनाम विशेषण क्रिया अव्यय (अविकारी)
व्यक्तिवाचक पुरुषवाचक गुणवाचक सकर्मक क्रियाविशेषण अव्यय
जातिवाचक निश्चयवाचक परिमाणवाचक अकर्मक संबंधसूचक अव्यय
भाववाचक अनिश्चयवाचक संख्यावाचक संयुक्त क्रिया समुच्चयबोधक अव्यय
द्रव्यवाचक निजवाचक सार्वनामिक प्रेरणार्थक क्रिया विस्मयादिबोधक अव्यय
समूहवाचक प्रश्नवाचक — सहायक क्रिया —
व्याकरण चार्ट: क्रिया के काल एवं संधि के प्रकार:

क्रिया के काल

  • वर्तमान काल : सामान्य, अपूर्ण, पूर्ण
  • भूतकाल : सामान्य, अपूर्ण, पूर्ण
  • भविष्य काल : सामान्य

संधि के प्रकार

  • स्वर संधि (दो स्वरों का मेल)
  • व्यंजन संधि (व्यंजन से स्वर/व्यंजन का मेल)
  • विसर्ग संधि (विसर्ग के साथ मेल)
← Previous Index

पाठ परिचय : स्‍वतंत्रता गान (गोपालसिंह नेपाली)

'स्‍वतंत्रता गान' सुप्रसिद्ध गीतकार एवं कवि गोपालसिंह नेपाली द्वारा रचित एक अत्यंत ओजस्वी एवं प्रेरणादायी देशभक्ति गीत है। इस कविता में कवि देशवासियों से यह पावन आह्वान करते हैं कि सदियों की दासता के बाद प्राप्त हुई इस बहुमूल्य स्वतंत्रता के दीपक को किसी भी हाल में बुझने नहीं देना है। चाहे जीवन में कितनी भी विषम व प्रतिकूल परिस्थितियाँ क्यों न आ जाएँ, हर भारतीय का यह परम कर्तव्य है कि वह देश की आजादी, अखंडता और स्वाभिमान की सदैव रक्षा करे।

कविता के प्रमुख जीवन-मूल्य एवं सीख

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. 'दीया बुझे नहीं' से कवि का क्या आशय है?

यहाँ 'दीया' स्वतंत्रता, राष्ट्रीय स्वाभिमान और संप्रभुता का पावन प्रतीक है। 'दीया बुझे नहीं' का अर्थ है कि देश की आजादी पर किसी भी प्रकार का संकट न आने पाए और वह सदैव प्रज्वलित रहे।

२. दीए को किसके प्राणों का दान कहा गया है?

दीए को देश की बलिवेदी पर हँसते-हँसते न्योछावर होने वाले अमर शहीदों के 'पुण्य प्राण दान' का पावन प्रतिफल कहा गया है।

३. कवि किन-किन स्थानों पर दीए के जलते रहने की कामना करते हैं?

कवि हर भारतीय के द्वार पर, गंगा की धार में, नदी के तीर और कछार पर, तथा शहीदों की कब्र और मजार पर हर हाल में स्वतंत्रता का दीपक जलते रहने की कामना करते हैं।

संबंधित महत्वपूर्ण विषय

Swatantrata Gaan Class 9 Hindi Unit 2 ९वीं हिंदी स्वतंत्रता गान स्वाध्याय प्रश्न उत्तर Gopal Singh Nepali Kavita Solutions Pattern Chart Sanjal Diagram Hindi Lokbharti Unit 2 Chapter 11 Solutions
Link copied to clipboard!