Q1)
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए: संजाल पूर्ण कीजिए: (सिरचन द्वारा बनाई जाने वाली कलात्मक वस्तुएँ)
उत्तर :
मोथे की घास की रंगीन व सुंदर शीतलपाटी
बांस की तीलियों की कलात्मक चिक (पर्दा)
↖
↗
सिरचन द्वारा बनाई जाने वाली कलात्मक वस्तुएँ
↙
↘
पटेर की घास की चटाई
पूजा-अर्चना के लिए कुश की बनी आसनी
Q2)
कृति पूर्ण कीजिए: सिरचन के स्वभाव की विशेषताएँ:
उत्तर :
कुशल एवं सिद्धहस्त कारीगर
अत्यंत स्वाभिमानी एवं खुद्दार
↖
↗
सिरचन के स्वभाव की विशेषताएँ
↙
↘
भावुक और कोमल हृदय वाला
मुँहफट किंतु अपनत्व से परिपूर्ण
Q3)
वाक्यों का उचित घटनाक्रम लगाकर लिखिए:
दिए गए वाक्य:
- सातों तारे मंद पड़ गए।
- ये मेरी ओर से हैं, सब चीजें हैं दीदी!
- लोग उसको बेकार ही नहीं, 'बेगार' समझते हैं।
- मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है।
उत्तर (उचित घटनाक्रम):
- १. लोग उसको बेकार ही नहीं, 'बेगार' समझते हैं।
- २. मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है।
- ३. सातों तारे मंद पड़ गए।
- ४. ये मेरी ओर से हैं, सब चीजें हैं दीदी!
Q4)
अभिव्यक्ति: 'कला और कलाकार का सम्मान करना हमारा दायित्व है' इस कथन पर अपने विचार लिखिए:
उत्तर :
कला ईश्वर की देन है और कलाकार उस कला का सच्चा साधक होता है। हमारे देश में लोक-कलाओं और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा रही है। कलाकार अपनी कला में अपनी आत्मा, समय और भावनाएँ उड़ेल देता है:
- कलाकार का स्वाभिमान: एक सच्चा कलाकार धन या भोजन का भूखा नहीं होता, वह केवल प्रेम, आदर और अपनी कला के सम्मान का भूखा होता है। जब कोई उसकी कला का तिरस्कार करता है, तो उसके स्वाभिमान को गहरी 'ठेस' पहुँचती है।
- सिरचन का उदाहरण: सिरचन ने मानू दीदी के ससुराल के लिए अपनी निष्ठा से शीतलपाटी और चिक बनाई, परंतु अपमानित होने पर उसने पैसे ठुकरा दिए और स्टेशन जाकर मुफ्त में उपहार स्वरूप मानू को भेंट कर दी। यह कलाकार की महानता का प्रतीक है।
- हमारा कर्तव्य: हमें समाज के सभी पारंपरिक कारीगरों, लोक कलाकारों और हुनरमंदों को यथोचित आदर, पारिश्रमिक और प्रोत्साहन देना चाहिए ताकि हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रह सके।
Q5)
भाषा बिंदु (व्याकरण): कोष्ठक की सूचना के अनुसार निम्नलिखित वाक्यों का काल परिवर्तन कीजिए:
उत्तर :
| मूल वाक्य व सूचना |
परिवर्तित वाक्य |
1. अली घर से बाहर चला जाता है। (सामान्य भूतकाल) |
अली घर से बाहर चला गया। |
2. आराम हराम हो जाता है। (पूर्ण वर्तमानकाल) |
आराम हराम हो गया है। |
3. आराम हराम हो जाता है। (पूर्ण भविष्यकाल) |
आराम हराम हो चुका होगा। |
4. सरकार एक ही टैक्स लगाती है। (सामान्य भविष्यकाल) |
सरकार एक ही टैक्स लगाएगी। |
5. आप इतनी देर से नाप-तौल करते हैं। (अपूर्ण वर्तमानकाल) |
आप इतनी देर से नाप-तौल कर रहे हैं। |
6. वे बाजार से नई पुस्तक खरीदते हैं। (पूर्ण भूतकाल) |
उन्होंने बाजार से नई पुस्तक खरीदी थी। |
7. वे बाजार से नई पुस्तक खरीदते हैं। (अपूर्ण भविष्यकाल) |
वे बाजार से नई पुस्तक खरीद रहे होंगे। |
पाठ परिचय : ठेस (फणीश्वरनाथ 'रेणु')
महान आंचलिक कथाकार फणीश्वरनाथ 'रेणु' द्वारा रचित 'ठेस' लोककला, ग्रामीण जीवन और एक संवेदनशील कलाकार के स्वाभिमान की मर्मस्पर्शी कहानी है। सिरचन शीतलपाटी और चिक बनाने वाला एक कुशल ग्रामीण कलाकार है। समाज के स्वार्थी लोग जब उसके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाते हैं तो वह काम छोड़ देता है, किंतु मानू दीदी के प्रति स्नेह के कारण वह उपहार स्वरूप स्वयं बनाई सुंदर कलाकृतियाँ स्टेशन पर भेंट करता है।
पाठ के प्रमुख विचार एवं कलाकार का स्वाभिमान
- सिरचन का स्वाभिमान : कलाकार पैसे का भूखा नहीं होता, वह सम्मान और प्रेम का भूखा होता है।
- लोककला का महत्व : शीतलपाटी और मोथी की चिक जैसी पारंपरिक हस्तकलाओं का सांस्कृतिक महत्व।
- निःस्वार्थ प्रेम : मानू दीदी के ससुराल विदा होते समय सिरचन द्वारा बिना पारिश्रमिक के अनमोल कलाकृतियाँ भेंट करना।
बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
१. सिरचन ने काम अधूरा क्यों छोड़ दिया था?
मँझली भाभी द्वारा दिए गए अपमानजनक ताने और तिरस्कार के कारण सिरचन के स्वाभिमान को गहरी ठेस लगी थी, इसलिए उसने काम छोड़ दिया।
२. काल के मुख्य भेद और उपभेद कौन-से हैं?
हिंदी में काल के मुख्य ३ भेद होते हैं: १. वर्तमान काल २. भूतकाल ३. भविष्य काल। प्रत्येक काल के तीन प्रमुख उपभेद—सामान्य, अपूर्ण और पूर्ण होते हैं।
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