Q1)
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए: संजाल पूर्ण कीजिए: (एकांकी के प्रमुख पात्रों की विशेषताएँ)
उत्तर :
उमा: सुशिक्षित, स्वाभिमानी और स्पष्टवक्ता युवती
रामस्वरूप: उमा के पिता, आधुनिक किंतु विवश
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एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' के प्रमुख पात्र
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↘
गोपाल प्रसाद: रूढ़िवादी, विवाह को बिजनेस मानने वाले
शंकर: कायर, चरित्रहीन और रीढ़ की हड्डी विहीन
Q2)
कृति पूर्ण कीजिए: गोपाल प्रसाद की दृष्टि में बहू ऐसी होनी चाहिए:
उत्तर :
अधिक पढ़ी-लिखी न हो (केवल मैट्रिक तक पढ़ी हो)।
चेहरे पर चश्मा न लगाती हो और सुंदर दिखती हो।
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गोपाल प्रसाद की दृष्टि में बहू
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↘
घर का सारा काम-काज और सिलाई-बुनाई जानती हो।
अधिक बातें न करती हो और ससुराल के नियम माने।
Q3)
कारण लिखिए:
1. बाप-बेटे चौंक उठे...
उत्तर :
क्योंकि जैसे ही उमा ने सिर उठाया, उन्होंने उसके चेहरे पर सुनहरी रिम वाला चश्मा देखा और वे दोनों चश्मे वाली लड़की को पसंद नहीं करते थे।
2. उमा को चश्मा लगा...
उत्तर :
क्योंकि पिछले महीने उमा की आँखें दुखने लगी थीं, जिसके इलाज के तौर पर डॉक्टर ने उसे कुछ दिनों के लिए चश्मा लगाने की सलाह दी थी।
3. रामस्वरूप ने हारमोनियम उठाकर लाने को कहा...
उत्तर :
क्योंकि वे गोपाल प्रसाद और उनके बेटे शंकर को यह दिखाना चाहते थे कि उनकी बेटी उमा गायन, संगीत और वाद्य वादन में निपुण है।
4. उमा को गुस्सा आया...
उत्तर :
क्योंकि गोपाल प्रसाद उसे किसी बेजान फर्नीचर या भेड़-बकरी की तरह तौल रहे थे और उसके आत्मसम्मान, शिक्षा तथा स्वाभिमान को ठेस पहुँचा रहे थे।
Q4)
सूचनानुसार लिखिए:
1. कृदंत बनाइए:
उत्तर :
पढ़ना → पढ़ाकू
समझना → समझदार
सीना → सिलाई / सीनेवाला
चाहना → चाहत
2. शब्दयुग्म पूर्ण कीजिए:
उत्तर :
पढ़े – लिखे
सभा – सोसायटी
पेंटिंग – वेंटिंग
सीधा – साधा
Q5)
अभिव्यक्ति (स्वमत): 'नारी शिक्षा का समाज पर प्रभाव' अथवा 'एकांकी के शीर्षक की सार्थकता' पर विचार लिखिए:
उत्तर (शीर्षक की सार्थकता व नारी चेतना):
प्रस्तुत एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' अत्यंत सार्थक, प्रतीकात्मक और सोद्देश्य है:
- शारीरिक व चारित्रिक दुर्बलता: रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा और सुदृढ़ खड़ा रखने वाला प्रमुख अंग है। एकांकी में शंकर की रीढ़ की हड्डी शारीरिक रूप से भी झुकी हुई है और नैतिक रूप से भी उसका कोई चरित्र या व्यक्तित्व नहीं है। वह अपने पिता के पीछे चलने वाला रीढ़-विहीन युवक है।
- सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार: समाज में जो लोग स्वयं उच्च शिक्षित होकर भी बहू के रूप में कम पढ़ी-लिखी लड़की ढूँढ़ते हैं और नारी को केवल उपभोग की वस्तु समझते हैं, उनकी सोच भी 'रीढ़-विहीन' (विकृत) है।
- नारी का स्वाभिमान: उमा जैसी शिक्षित और साहसी लड़की अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए रूढ़िवादी सोच का विरोध करती है। यह एकांकी यह सिद्ध करती है कि व्यक्तित्व और चरित्र की सुदृढ़ता ही समाज की वास्तविक रीढ़ की हड्डी है।
पाठ परिचय : रीढ़ की हड्डी (जगदीशचंद्र माथुर)
प्रसिद्ध नाटककार जगदीशचंद्र माथुर द्वारा रचित 'रीढ़ की हड्डी' एक सशक्त और यथार्थवादी सामाजिक एकांकी है। इस नाटक के माध्यम से लेखक ने समाज में नारी शिक्षा के प्रति दोहरे मापदंड रखने वाले, विवाह को व्यापार समझने वाले रूढ़िवादी लोगों पर करारा व्यंग्य किया है। उमा के माध्यम से लेखक ने आधुनिक नारी के स्वाभिमान, साहस और चेतना को अभिव्यक्ति दी है।
एकांकी के प्रमुख पात्र एवं संदेश
- उमा : बी.ए. शिक्षित, स्वाभिमानी और स्पष्टवक्ता युवती जो नारी को वस्तु समझने का कड़ा विरोध करती है।
- गोपाल प्रसाद व शंकर : दोहरे चरित्र और नारी-विरोधी सोच के प्रतिनिधि पात्र।
- सामाजिक संदेश : नारी का आत्मसम्मान सर्वोपरि है; बिना चरित्र और नैतिक रीढ़ के समाज का उत्थान असंभव है।
बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
१. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
समाज में स्त्रियों की शिक्षा, उनके अधिकारों और विवाह के नाम पर होने वाले उनके अपमानजनक परीक्षण के विरुद्ध आवाज उठाना इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य है।
२. उमा ने विवाह से इनकार क्यों किया?
क्योंकि गोपाल प्रसाद और शंकर उसे भेड़-बकरी या फर्नीचर की तरह तौल रहे थे और शंकर का अपना कोई चरित्र और आत्मसम्मान नहीं था।
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