पहली इकाई | पाठ ११ : कृषक गान

कविता - दिनेश भारद्वाज (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए: संजाल पूर्ण कीजिए: (कृषक की दयनीय दशा दर्शाने वाली बातें)
उत्तर :
अपने दुर्बल तन को पत्तियों से ढँकना।
खून-पसीने से बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना।
↖ ↗
कृषक की दयनीय दशा दर्शाने वाली बातें
↙ ↘
संसार का पेट भरकर स्वयं अभावों में रहना।
कठोर परिश्रम करने पर भी उपेक्षित जीवन जीना।
Q2) वाक्य पूर्ण कीजिए:
1. कृषक कमजोर शरीर को...
उत्तर :

कृषक कमजोर शरीर को पत्तियों से पालता है।

2. कृषक बंजर जमीन को...
उत्तर :

कृषक बंजर जमीन को अपने खून-पसीने से सींचकर उर्वरा (उपजाऊ) बना देता है।

Q3) निम्नलिखित पंक्तियों में कवि के मन में कृषक के प्रति जागृत होने वाले भाव लिखिए:
उत्तर :
काव्य पंक्ति जागृत होने वाला भाव
1. आज उसपर मान कर लूँ अभिमान (गर्व का भाव)
2. आह्वान उसका आज कर लूँ मानवता एवं सम्मान का भाव
3. नव सृष्टि का निर्माण कर लूँ सृजनशीलता का भाव
4. आज उसका ध्यान कर लूँ आदर, कृतज्ञता एवं श्रद्धा का भाव
Q4) कविता में आए इन शब्दों के लिए प्रयुक्त समानार्थी शब्द लिखिए:
उत्तर :
१. निर्माता → सृजक
२. शरीर → तन
३. राक्षस → असुर
४. मानव → मानुष
Q5) निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए:
उत्तर :
मुद्दे विश्लेषण
1. रचनाकार का नाम दिनेश भारद्वाज
2. रचना की विधा कविता (गीत)
3. पसंद की पंक्तियाँ "हाथ में निज हाथ धरकर, आज उसका ध्यान कर लूँ। उस कृषक का गान कर लूँ॥"
4. पसंद होने का कारण इन पंक्तियों में अन्नदाता किसान के प्रति कवि की गहरी संवेदना, श्रद्धा और कृतज्ञता का सुंदर प्रकटीकरण हुआ है, जो हमें किसान के त्याग का स्मरण कराता है।
5. रचना से प्राप्त संदेश किसान हमारे देश का अन्नदाता और भाग्य-विधाता है। हमें उसके श्रम का सम्मान करना चाहिए और उसके जीवन को खुशहाल बनाने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए।
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पाठ परिचय : कृषक गान (दिनेश भारद्वाज)

कवि दिनेश भारद्वाज द्वारा रचित 'कृषक गान' देश के अन्नदाता किसान की अनथक मेहनत, त्याग और समर्पण को समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण कविता है। कवि ने स्पष्ट किया है कि चिलचिलाती धूप, कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश में भी किसान संपूर्ण संसार का भरण-पोषण करने के लिए दिन-रात खेतों में पसीना बहाता है। कवि ऐसे सृजनशील अन्नदाता पर गर्व करते हुए उसका गान गाना चाहते हैं।

कविता के प्रमुख विचार एवं मूल्य

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. कवि किसान पर गर्व क्यों करना चाहते हैं?

क्योंकि किसान अभावों में रहकर भी सारे संसार को अन्न देकर पालता है और बंजर धरती को भी अपनी मेहनत से उपजाऊ बना देता है।

२. कविता में किसान के लिए कौन-से विशेष शब्द आए हैं?

कविता में किसान को 'सृजक' (निर्माता), 'अन्नदाता' और 'त्याग की मूर्ति' कहा गया है।

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