| प्राइवेट अस्पताल | सार्वजनिक अस्पताल |
|---|---|
| यहाँ मरीजों के लिए अच्छी और आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं। | यहाँ अक्सर मरीजों की अत्यधिक भीड़ और सुविधाओं का अभाव होता है। |
| प्राइवेट वॉर्ड | जनरल वॉर्ड |
|---|---|
| प्राइवेट वॉर्ड में मरीज से मिलने का कोई निश्चित समय नहीं होता; हमदर्द जब चाहें आ सकते हैं। | जनरल वॉर्ड में मरीज से मिलने का निश्चित नियम व सीमित समय निर्धारित होता है। |
क्योंकि अपरिचित आगंतुक को रोते देखकर लेखक की पत्नी ने उसे कोई घनिष्ठ रिश्तेदार या मित्र समझ लिया और बिना पूछे ही टैक्सीवाले को किराये के पैसे दे दिए थे।
क्योंकि यदि वहाँ परिचित होंगे तो वे हमदर्दी जताने के बहाने समय-असमय अस्पताल आकर लेखक को परेशान करेंगे और उसे चैन से आराम नहीं करने देंगे।
चिड़ियाघर (प्राणी-संग्रहालय)
लंगर (सदाव्रत / भंडारा)
मरीज से मिलने अस्पताल जाते समय हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियाँ बरतनी चाहिए:
| वाक्य | संज्ञा शब्द एवं भेद |
|---|---|
| 1. सोनाबाई अपने चार बच्चों के साथ आई। | सोनाबाई - व्यक्तिवाचक संज्ञा बच्चों - जातिवाचक संज्ञा |
| 2. गाय बहुत दूध देती है। | गाय - जातिवाचक संज्ञा दूध - द्रव्यवाचक संज्ञा |
| 3. मैं रोज ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ। | ईश्वर - जातिवाचक संज्ञा प्रार्थना - भाववाचक संज्ञा |
| 4. सैनिकों की टुकड़ी आगे बढ़ी। | सैनिकों - जातिवाचक संज्ञा टुकड़ी - समूहवाचक संज्ञा |
| 5. सोना-चाँदी और भी महँगे होते जा रहे हैं। | सोना, चाँदी - द्रव्यवाचक संज्ञा |
| 6. गोवा देख मैं तरंगायित हो उठा। | गोवा - व्यक्तिवाचक संज्ञा |
| 7. युवकों का दल बचाव कार्य में लगा था। | युवकों - जातिवाचक संज्ञा दल - समूहवाचक संज्ञा |
| 8. आपने विदेश में भ्रमण तो कर लिया है। | विदेश - जातिवाचक संज्ञा भ्रमण - भाववाचक संज्ञा |
| 9. इस कहानी में भारतीय समाज का चित्रण मिलता है। | कहानी, समाज - जातिवाचक संज्ञा चित्रण - भाववाचक संज्ञा |
| 10. सागर का जल खारा होता है। | सागर - जातिवाचक संज्ञा जल - द्रव्यवाचक संज्ञा |
प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्यकार घनश्याम अग्रवाल द्वारा रचित 'वाह रे! हमदर्द' एक अत्यंत गुदगुदाने वाला और यथार्थवादी निबंध है। दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती मरीज की कुशल-क्षेम पूछने आने वाले 'हमदर्दों' के कारण मरीज को मिलने वाले कष्ट और मानसिक तनाव का लेखक ने बड़ा ही सजीव और व्यंग्यात्मक चित्रण किया है। यह पाठ हमें सिखाता है कि हमदर्दी ऐसी होनी चाहिए जो मरीज को राहत दे, न कि परेशानी बढ़ाए।
क्योंकि एक अपरिचित आगंतुक को रोते देख लेखक की पत्नी ने उसे करीबी संबंधी समझकर बिना पूछे ही टैक्सीवाले को भाड़ा दे दिया था।
मरीज को शांति और विश्राम की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। अतः अस्पताल के नियत समय पर ही जाएँ, बच्चों को न ले जाएँ और अधिक समय तक न बैठें।
हिंदी व्याकरण में संज्ञा के ५ मुख्य भेद होते हैं: १. व्यक्तिवाचक संज्ञा २. जातिवाचक संज्ञा ३. भाववाचक संज्ञा ४. समूहवाचक संज्ञा ५. द्रव्यवाचक संज्ञा।