दूसरी इकाई | पाठ २ : दो लघुकथाएँ (पूरक पठन)

लघुकथाएँ (कंगाल / सही उत्तर) - नरेंद्र छाबड़ा (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) संजाल पूर्ण कीजिए :
१. भीषणता
२. अंगारे-सी तपन
↖ ↗
गरमी की विशेषताएँ
↙ ↘
३. लू चलना
४. उमस होना
Q2) उत्तर लिखिए :
मौसम ऐसा था :
१. लिजलिजा
२. घुटन भरा
Q3) कारण लिखिए :
1. युवक को पहले नौकरी न मिल सकी, क्योंकि :
उत्तर : हर जगह भ्रष्टाचार, रिश्वत और सिफारिश का बोलबाला था, जिसके कारण योग्य होने के बावजूद उसे नौकरी नहीं मिल सकी।
2. आखिरकार अधिकारियों द्वारा युवक का चयन कर लिया गया, क्योंकि :
उत्तर : साक्षात्कार ले रहे अधिकारियों ने गंभीरता से विचार-विमर्श करने के बाद युवक के निर्भीक, ईमानदार और सटीक उत्तर की खुले दिल से दाद दी थी।
Q4) कृति पूर्ण कीजिए :
पहाड़ों पर सैर-सपाटे में हजारों रुपये खर्च करना।
बड़े-बड़े होटलों में भारी भरकम बिल चुकाना।
↖ ↗
लेखक के मन परिवर्तन के कारण
↙ ↘
बड़ी दुकानों में बिना मोलभाव किए पैसे देना।
गरीब रेहड़ीवाले से दो रुपये के लिए झिक-झिक करना।
Q5) प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए :
लोग रिश्वत देकर ये लाभ उठाते हैं :
१. रुके हुए कार्य करवाना
↓
२. दबी हुई फाइलें निकलवाना
↓
३. टलती हुई पदोन्नति (प्रमोशन) करवाना
↓
४. रोकी गई नौकरी प्राप्त करना
Q6) अभिव्यक्ति :
‘भ्रष्टाचार एक कलंक’ विषय पर अपने विचार लिखिए :
विचार : भ्रष्टाचार का अर्थ है दूषित आचरण या नैतिक मूल्यों का पतन। आज हमारे समाज और देश के कई क्षेत्रों में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या बन चुका है। रिश्वतखोरी, मिलावट, पक्षपात और अधिकारों का दुरुपयोग इसके प्रमुख रूप हैं।

भ्रष्टाचार के कारण योग्य और परिश्रमी व्यक्तियों का हक छिन जाता है और अयोग्य लोग अनुचित लाभ उठा लेते हैं। यह देश की आर्थिक प्रगति और सामाजिक न्याय की राह में सबसे बड़ी बाधा है। जब तक हर नागरिक स्वयं रिश्वत न देने और न लेने का दृढ़ संकल्प नहीं करेगा, तब तक इस बुराई का पूरी तरह अंत नहीं हो सकता। हमें नई पीढ़ी में ईमानदारी और नैतिकता के संस्कार जगाने होंगे, तभी हमारा राष्ट्र भ्रष्टाचार के कलंक से मुक्त होकर सशक्त बन सकेगा।
Q7) भाषा बिंदु - अर्थ के आधार पर वाक्य भेद :
अर्थ के आधार पर निम्न वाक्यों के भेद लिखिए :
क्र. वाक्य अर्थ के आधार पर वाक्य भेद
१. क्या पैसा कमाने के लिए गलत रास्ता चुनना उचित है? प्रश्नवाचक वाक्य
२. इस वर्ष भीषण गरमी पड़ रही थी। विधानवाचक वाक्य
३. आप उन गहनों की चिंता न करें। निषेधवाचक वाक्य
४. सुनील, जरा ड्राइवर को बुलाओ। आज्ञावाचक वाक्य
५. अपने समय के लेखकों में आप किन्हें पसंद करते हैं? प्रश्नवाचक वाक्य
६. सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। विधानवाचक वाक्य
७. हाय! कितनी निर्दयी हूँ मैं। विस्मयादिबोधक वाक्य
८. काकी उठो, भोजन कर लो। आज्ञावाचक वाक्य
९. वाह! कैसी सुगंध है। विस्मयादिबोधक वाक्य
१०. तुम्हारी बात मुझे अच्छी नहीं लगी। निषेधवाचक वाक्य
Q8) भाषा बिंदु - वाक्य रूपांतरण :
कोष्ठक की सूचना के अनुसार निम्न वाक्यों में अर्थ के आधार पर परिवर्तन कीजिए :
1. थोड़ी बातें हुईं। (निषेधार्थक वाक्य)
उत्तर : थोड़ी भी बातें नहीं हुईं।
2. मानू इतना ही बोल सकी। (प्रश्नार्थक वाक्य)
उत्तर : क्या मानू इतना ही बोल सकी?
3. मैं आज रात का खाना नहीं खाऊँगा। (विधानार्थक वाक्य)
उत्तर : मैं आज रात का खाना खाऊँगा।
4. गाय ने दूध देना बंद कर दिया। (विस्मयार्थक वाक्य)
उत्तर : अरे! गाय ने दूध देना बंद कर दिया!
5. तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। (आज्ञार्थक वाक्य)
उत्तर : तुम अपना ख्याल रखो।
Q9) भाषा बिंदु - रचना के आधार पर वाक्य भेद :
रचना के आधार पर वाक्यों के भेद पहचानकर लिखिए :
क्र. वाक्य रचना के आधार पर भेद
१. अधिकारियों के चेहरे पर हलकी-सी मुस्कान और उत्सुकता छा गई। सरल वाक्य
२. हर ओर से अब वह निराश हो गया था। सरल वाक्य
३. उसे देख-देख बड़ा जी करता कि मौका मिलते ही उसे चलाऊँ। मिश्र वाक्य
४. वह बूढ़ी काकी पर झपटी और उन्हें दोनों हाथों से झटककर बोली। संयुक्त वाक्य
५. मोटे तौर पर दो वर्ग किए जा सकते हैं। सरल वाक्य
६. अभी समाज में यह चल रहा है क्योंकि लोग अपनी आजीविका शरीर श्रम से चलाते हैं। संयुक्त वाक्य
Q10) उपयोजित लेखन : निबंध लेखन
‘जल है तो कल है’ विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लिखिए :
निबंध : जल है तो कल है

जल प्रकृति का दिया हुआ वह अनमोल उपहार है, जिसके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हवा के बाद प्राणी मात्र के जीवित रहने के लिए सबसे आवश्यक वस्तु पानी ही है। इसीलिए हमारे पूर्वज कह गए हैं कि ‘जल ही जीवन है’।

हमें पीने, भोजन बनाने, खेती-बाड़ी और उद्योगों के लिए जल की आवश्यकता होती है। किंतु आज तेजी से बढ़ती जनसंख्या, अंधाधुंध औद्योगिकीकरण और वनों की कटाई के कारण पीने योग्य शुद्ध जल का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। भूजल स्तर निरंतर नीचे गिरता जा रहा है और नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं। यदि हमने समय रहते पानी की बर्बादी नहीं रोकी, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।

हमें वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) अपनाना होगा, नलों को व्यर्थ खुला छोड़ने से बचना होगा और जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखना होगा। जल का संरक्षण केवल सरकार का नहीं, अपितु हम सभी का परम कर्तव्य है। सच ही कहा गया है कि यदि आज हम जल बचाएंगे, तभी हमारा कल सुरक्षित रहेगा।

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पाठ परिचय : दो लघुकथाएँ (नरेंद्र छाबड़ा)

सुप्रसिद्ध लघुकथाकार नरेंद्र छाबड़ा द्वारा रचित 'दो लघुकथाएँ' समाज की दो अलग-अलग विद्रूपताओं और विसंगतियों पर करारा प्रहार करती हैं। पहली लघुकथा 'कंगाल' में मध्यमवर्गीय संकीर्ण मानसिकता पर चोट की गई है, जहाँ लोग महंगे होटलों में अंधाधुंध खर्च करते हैं किंतु गरीब रेहड़ी वालों से दो-चार रुपयों के लिए मोलभाव करते हैं। दूसरी कथा 'सही उत्तर' में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और भाई-भतीजावाद के दौर में एक बेरोजगार युवक की निर्भीकता और सत्यवादिता का प्रेरक चित्रण है।

महत्वपूर्ण बिंदु एवं जीवन-मूल्य

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. लेखक ने वास्तव में 'कंगाल' किसे माना है?

जो लोग बड़े होटलों और मॉल में शान-शौकत से हजारों रुपये खर्च करते हैं, परंतु गरीब और असहाय फल-सब्जी विक्रेताओं से चंद रुपयों के लिए झगड़ते हैं, लेखक ने उनकी इस संकीर्ण मानसिकता को सच्चा 'कंगाल' कहा है।

२. साक्षात्कार में युवक का चयन क्यों हुआ?

युवक ने बिना किसी संकोच के साक्षात्कार बोर्ड के सामने भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के कड़वे सच को निर्भीकता, ईमानदारी और सत्य के साथ रखा। उसके इस नैतिक साहस और सच्चाई से प्रभावित होकर चयनकर्ताओं ने उसका चयन किया।

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