यदि पैसे न देने वाले किसी व्यक्ति के घर चोरी हो जाए, तो लोग और पुलिस सबसे पहले चौकीदार से ही पूछताछ करेंगे और उस पर मिलीभगत का झूठा आरोप लगा सकते हैं। ऐसी बदनामी और कानूनी झंझट से बचने के लिए चौकीदार बिना पैसे दिए भी उन घरों की पूरी निष्ठा से रखवाली करता है।
रात के सन्नाटे में जब चौकीदार अकेले पहरा देता है, तो नशेड़ी, जुआरी, गुंडे और बदमाश उससे अकारण झगड़ा और मारपीट कर बैठते हैं। इसके अतिरिक्त कई सभ्य दिखने वाले लोग भी उस पर अविश्वास करते हैं और व्यर्थ का रौब झाड़ते हैं, जिससे वह स्वयं को असुरक्षित पाता है।
| वाक्यांश (अनेक शब्द) | एक शब्द | सार्थक वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| १. रातों में सड़क पर लाठी ठोंकते, सीटी बजाकर पहरा देने वाला | चौकीदार | चौकीदार की सजगता से कॉलोनी में चोरी की घटना टल गई। |
| २. अपनी जिम्मेदारियाँ तथा कर्तव्य ईमानदारी से निभाने वाला | कर्तव्यनिष्ठ | हमारे विद्यालय के शिक्षक अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ हैं। |
| ३. जो कभी नष्ट न होने वाला हो | अनश्वर | मनुष्य की आत्मा अनश्वर और अजर-अमर है। |
| ४. दूसरों द्वारा किए गए उपकार को मानने वाला | कृतज्ञ | हमें संकट में सहायता करने वाले के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। |
| ५. बहुत कम बोलने वाला व्यक्ति | अल्पभाषी | मेरे दादाजी स्वभाव से बहुत शांत और अल्पभाषी हैं। |
जब सारा शहर और समाज चैन की नींद सो रहा होता है, तब रात का चौकीदार और पुलिसकर्मी कड़ाके की ठंड, मूसलाधार बारिश और भयंकर गर्मी में जागकर हमारी जान-माल की रक्षा करते हैं। वे अपने व्यक्तिगत सुख और परिवार की चिंता छोड़कर समाज की शांति और सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
दुर्भाग्य से हमारे समाज का एक वर्ग ऐसे मेहनतकश चौकीदारों को यथोचित सम्मान और समय पर पारिश्रमिक नहीं देता। वे मामूली मेहनताने में भी अपनी जान जोखिम में डालकर अपना कर्तव्य निभाते हैं। हमें ऐसे निष्ठावान रक्षकों के प्रति सहानुभूति, आदर और सम्मान का भाव रखना चाहिए और उनके परिश्रम का उचित मूल्यांकन करना चाहिए।
संवेदनशील कथाकार सुरेश कुशवाहा 'तन्मय' द्वारा रचित 'रात का चौकीदार' एक अत्यंत मार्मिक और यथार्थवादी लघुकथा है। इसमें समाज के उस उपेक्षित किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ग (चौकीदार) के संघर्ष, कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी को उजागर किया गया है, जो रातभर जागकर लोगों की सुरक्षा करता है, किंतु समाज उसे तुच्छ समझता है और उसका शोषण करता है।
चौकीदार की मुख्य समस्या यह थी कि जान जोखिम में डालकर रातभर पहरा देने के बावजूद कई लोग उसे महीने के अंत में मामूली मेहनताना देने में भी हीलाहवाली करते थे।
जब चौकीदार ने बताया कि जो पैसे नहीं देते वह उनके घर की भी पूरी ईमानदारी से रखवाली करता है ताकि उन पर कोई झूठा आरोप न लगे, तो लेखक उसकी कर्तव्यनिष्ठा से अत्यधिक प्रभावित हुए।
लघुकथा का मुख्य उद्देश्य समाज को गरीब, मेहनतकश चौकीदारों के प्रति संवेदनशील बनाना और उनके अधिकारों व श्रम का आदर करना सिखाना है।