पहली इकाई | पाठ ११ : निर्माणों के पावन युग में

कविता - अटल बिहारी वाजपेयी (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए: प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए:
(क) निर्माणों के पावन युग में हम इन्हें न भूलें:
उत्तर :
निर्माणों के पावन युग में हम इसे न भूलें
१. चरित्र निर्माण
२. वसुधा (संसार) का कल्याण
३. जीवन का उत्थान
(ख) कृति पूर्ण कीजिए: यह होना जरूरी है:
उत्तर :
यह होना जरूरी है
आविष्कारों में
↓
मानव का प्यार
विज्ञान में
↓
प्राणी का उपकार
Q2) भाषा बिंदु: कोष्ठक में से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
उत्तर :
वाक्य दिए गए विकल्प सही शब्द
१. आर्यभट्ट ने शून्य की _______ की। (खोज, अनुसंधान, आविष्कार) खोज
२. प्रगति के लिए आपसी _______ आवश्यक है। (ईर्ष्या, भागदौड़, स्पर्धा) स्पर्धा
३. कार्यक्रम शुरू करने के लिए अध्यक्ष जी की _______ चाहिए। (अनुमति, आज्ञा, आदेश) अनुमति
४. घने बादलों को देखकर बारिश की _______ है। (आशंका, संभावना, अवसर) संभावना
५. सड़क-योजना में सैकड़ों मजदूरों को _______ मिला। (निर्माण, निर्मिति, रोजगार) रोजगार
Q3) कविता की प्रथम चार पंक्तियों का सरल भावार्थ लिखिए:
"निर्माणों के पावन युग में हम चरित्र निर्माण न भूलें, स्वार्थ साधना की आँधी में वसुधा का कल्याण न भूलें..."
भावार्थ :

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रकवि अटल बिहारी वाजपेयी जी इस प्रेरक कविता में कहते हैं कि वर्तमान युग ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और भौतिक निर्माणों का अत्यंत पावन और स्वर्णिम युग है। हम नए-नए कारखाने, पुल, उपग्रह और साधन बना रहे हैं; किंतु इस भौतिक विकास की चमक-दमक में हमें मनुष्य के चरित्र निर्माण को कदापि नहीं भूलना चाहिए।

यदि मनुष्य का चरित्र ही गिर गया, तो सारे भौतिक साधन व्यर्थ साबित होंगे। आज समाज में अपने निजी स्वार्थ की जो आँधी चल रही है, उसमें हमें संपूर्ण पृथ्वी और प्राणी-जगत के कल्याण की भावना को कभी विस्मृत नहीं करना चाहिए। भौतिक उन्नति तभी सार्थक है जब उसके साथ नैतिक मूल्यों और मानवता का उत्थान भी जुड़ा हो।

Q4) लेखनीय: 'देशहित के लिए मेरा योगदान' विषय पर अपने विचार लिखिए:
उत्तर :

"जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥" देशहित केवल सीमा पर बंदूक लेकर खड़े होने से ही सिद्ध नहीं होता, बल्कि एक सजग नागरिक और विद्यार्थी के रूप में भी हम देश के विकास में अपना अमूल्य योगदान दे सकते हैं।

देशहित के लिए मेरा प्रथम दायित्व है कि मैं निष्ठापूर्वक विद्याध्ययन करूँ, अपने चरित्र को उज्ज्वल बनाऊँ और समाज में स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करूँ। पानी और बिजली की बचत करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, नियमों का पालन करना और जाति-धर्म के भेदभाव को मिटाकर भाईचारा स्थापित करना ही सच्ची देशभक्ति है। मैं एक आदर्श नागरिक बनकर अपने भारत को विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनाने के लिए सदैव तत्पर रहूँगा।

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पाठ परिचय : निर्माणों के पावन युग में (अटल बिहारी वाजपेयी)

भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा रचित 'निर्माणों के पावन युग में' एक अत्यंत ओजस्वी, युगीन और प्रेरणादायी राष्ट्रीय कविता है। कवि ने इसमें विज्ञान, तकनीक और औद्योगिक विकास के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता, चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और विश्व-कल्याण के समन्वय पर बल दिया है। विज्ञान तभी कल्याणकारी है जब वह मानवता की सेवा करे।

कविता के प्रमुख जीवन-मूल्य एवं संदेश

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. कवि ने वर्तमान युग को 'पावन युग' क्यों कहा है?

क्योंकि इस युग में विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में नित्य नए-नए निर्माण और अभूतपूर्व उपलब्धियाँ हासिल हो रही हैं।

२. आविष्कारों और विज्ञान में क्या होना अनिवार्य बताया गया है?

आविष्कारों में मनुष्य का सच्चा प्यार और विज्ञान की प्रत्येक खोज में समस्त जीव-जगत के उपकार की भावना होना अनिवार्य है।

३. कवि किस आँधी से बचने की चेतावनी देते हैं?

कवि 'स्वार्थ साधना की आँधी' से बचने की चेतावनी देते हैं, जिसमें मनुष्य केवल अपने व्यक्तिगत लाभ में लगकर समाज और वसुधा के कल्याण को भूल जाता है।

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