दूसरी इकाई | पाठ १ : कह कविराय

कुंडलियाँ - गिरधर (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए: संजाल पूर्ण कीजिए:
संजाल प्रश्न: सयानों (बुद्धिमानों) के प्रमुख कार्य:
उत्तर :
१. घर में संपत्ति बढ़ने पर दोनों हाथों से दान करना
२. नाव में पानी भरने पर दोनों हाथों से बाहर उलीचना
↑ ↑
सयानों के काम
↓ ↓
३. सदैव ईश्वर के नाम (राम-नाम) का स्मरण करना
४. परोपकार व जनहित के लिए सर्वस्व समर्पित करना
Q2) कौआ और कोयल (कोकिल) में समानता तथा अंतर स्पष्ट कीजिए:
उत्तर :
मुद्दा कौआ (काग) कोयल (कोकिल)
समानता शरीर का रंग काला होता है। शरीर का रंग काला होता है।
वाणी (स्वर) कर्कश और कटु बोली बोलता है। अत्यंत मीठी और कर्णप्रिय बोली बोलती है।
सामाजिक सम्मान कर्कश वाणी के कारण अपवित्र मानकर भगा दिया जाता है। मधुर वाणी के कारण सभी लोग उसका आदर और सम्मान करते हैं।
Q3) कवि के मतानुसार मनुष्य की विचारधारा (ऋण के संदर्भ में):
उत्तर :
१. ऋण (कर्ज) लेते समय :

मनुष्य अत्यधिक दीन-हीन बनकर अत्यंत मीठी, विनीत और नम्र वाणी का प्रयोग करता है।

२. ऋण (कर्ज) लौटाते समय :

मनुष्य कठोरता और कड़वे वचनों पर उतर आता है, आँखें तरेरता है और मुँह मोड़ लेता है।

Q4) भाषा बिंदु: कुंडलियों में प्रयुक्त तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों का चयन कर वर्गीकरण कीजिए:
उत्तर :
तत्सम शब्द (संस्कृत रूप) तद्भव शब्द (परिवर्तित रूप) देशज शब्द (स्थानिक बोली)
शब्द गाहक (ग्राहक से) लाठी
सहस्र काग (काक से) डोलै (डोलना)
गुण कोकिला (कोयल) फटकै (झाड़ना)
हृदय (हिय) हाथ (हस्त से) सयानो
Q5) कल्पना पल्लवन: 'गुन के गाहक सहस नर' विषय पर अपने विचार स्पष्ट कीजिए:
उत्तर :

"विद्वान सर्वत्र पूज्यते" अर्थात् गुणी और विद्वान व्यक्ति की पूजा और सम्मान सर्वत्र होता है। कवि गिरधर कहते हैं कि संसार में गुणों के हजारों कद्रदान (गाहक) होते हैं, किंतु गुणहीन व्यक्ति की कोई पूछ नहीं होती। जिस प्रकार कौआ और कोयल दोनों ही काले रंग के होते हैं, परंतु अपनी मधुर वाणी के गुण के कारण कोयल को सब सिर-आँखों पर बिठाते हैं और कौवे को कोई पास फटकने नहीं देता।

मनुष्य की सच्ची पहचान उसके रूप, रंग, धन अथवा जाति से नहीं, बल्कि उसके सद्गुणों, ज्ञान, विनम्रता और चरित्र से होती है। गुणी व्यक्ति समाज का मार्गदर्शन करता है और दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाता है। अतः हमें केवल बाह्य आडंबरों में समय व्यर्थ न गँवाकर अपने भीतर सद्गुणों का विकास करना चाहिए।

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पाठ परिचय : कह कविराय (गिरधर)

रीतिकाल के नीति-काव्य के मूर्धन्य कवि गिरधर द्वारा रचित 'कुंडलियाँ' नीति, व्यवहार और लोक-अनुभव का अद्भुत भंडार हैं। गिरधर कविराय ने सीधी-सादी और सरल लोकभाषा में मनुष्य को व्यावहारिक जीवन के अनमोल सूत्र दिए हैं—जैसे विपत्ति में लाठी का सहारा, गुणी व्यक्ति का आदर, स्वार्थी मित्रों की पहचान, परोपकार और ऋण के व्यवहार में ईमानदारी।

कुंडलियों की प्रमुख नीतिपरक सीख

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. 'कुंडलिया' छंद की क्या विशेषता होती है?

कुंडलिया छंद दोहा और रोला के मेल से बनता है। जिस शब्द से कुंडलिया प्रारंभ होती है, उसी शब्द पर समाप्त होती है और तीसरे चरण में दोहे का अंतिम चरण दोहराया जाता है।

२. कवि गिरधर ने लाठी के क्या-क्या लाभ बताए हैं?

लाठी गहरे पानी और गड्ढों में थाह लेने, नदी पार करने, झाड़ियों व काँटों से बचने और अचानक कुत्ते या शत्रु के आक्रमण पर आत्मरक्षा करने में बहुत उपयोगी सिद्ध होती है।

३. 'नाव में पानी बढ़ने पर दोनों हाथ उलीचना' का क्या तात्पर्य है?

जिस प्रकार नाव में पानी भरने पर उसे दोनों हाथों से बाहर फेंकना पड़ता है ताकि नाव डूबने से बच सके, उसी प्रकार घर में धन-संपत्ति बढ़ने पर दोनों हाथों से दान करना चाहिए ताकि लोभ और पतन से बचा जा सके।

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