| मुद्दा | पहले का व्यवहार | बाद का व्यवहार |
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| खान | बच्चे कभी-कभी रोटी के टुकड़े देते और थाली का जूठन प्यार से खिलाते थे। | चोरी-छिपे मनचाही चीज खाने पर लोग उसे दुत्कारते और उस पर डंडा तानते थे। |
| पान | बच्चे कभी-कभी कटोरी में प्यार से दूध पिलाते थे। | चोरी से दूध-दही चट करने पर उस पर झल्लाते और सिर पर जूता या झाड़ू मारते थे। |
| मूल शब्द | विलोम शब्द | निर्मित नया वाक्य |
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| समझदार | नासमझ | गधा एक सीधा और नासमझ जानवर माना जाता है। |
| अल्पभाषी | वाचाल | आजकल कई राजनेता बहुत वाचाल स्वभाव के होते हैं। |
| पुरानी | नई | आज की युवा पीढ़ी नई प्रगतिशील विचारधारा को अपना रही है। |
| दुत्कार | सत्कार | भारतीय संस्कृति में अतिथियों का आत्मीय सत्कार किया जाता है। |
| समर्थन | विरोध | जागरूक जनता ने सरकार की जनविरोधी नीतियों का डटकर विरोध किया। |
| दुर्लभ | सुलभ | डिजिटल तकनीक के कारण आज सभी जानकारियाँ सुलभ हो गई हैं। |
| तटस्थ | पक्षपाती | एक सच्चे न्यायाधीश को कभी भी पक्षपाती नहीं होना चाहिए। |
| भौतिक | आध्यात्मिक | महान संत-महात्मा भौतिक सुखों को त्यागकर आध्यात्मिक जीवन जीते हैं। |
| शुष्क | हरी-भरी (आर्द्र) | वर्षा के आगमन पर सूखी पड़ी धरती चारों ओर हरी-भरी हो जाती है। |
| अपव्यय | मितव्यय | भविष्य की सुरक्षा के लिए हमें धन का मितव्यय करना सीखना चाहिए। |
'जियो और जीने दो' यह भगवान महावीर का अमर और शाश्वत संदेश है। प्रकृति ने इस पृथ्वी पर रहने वाले सभी छोटे-बड़े प्राणियों को जीवन जीने और फलने-फूलने का समान अधिकार प्रदान किया है। प्रकृति का संतुलन तभी बना रह सकता है जब हर जीव स्वतंत्र रूप से जीवित रहे।
मनुष्य स्वयं को श्रेष्ठ प्राणी मानता है, परंतु अपनी सुख-सुविधाओं और स्वार्थ के लिए वह वन्य जीवों के आवासों को नष्ट करता है, पेड़ों को काटता है और मूक प्राणियों पर अत्याचार करता है। यदि हम जीवों के जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप करेंगे तो जैव विविधता का संतुलन बिगड़ जाएगा। अतः हमें प्रत्येक प्राणी के प्रति करुणा, दया और प्रेम का भाव रखना चाहिए और उनके जीवन की रक्षा करनी चाहिए।
हास्य-व्यंग्यकार राजेंद्र शर्मा द्वारा रचित 'बिल्ली का बिलुंगड़ा' एक अत्यंत रोचक और हास्यपूर्ण कहानी है। इसमें लेखक ने दिखाया है कि किस प्रकार मनुष्य अपनी तात्कालिक समस्या से छुटकारा पाने के लिए जल्दबाजी में कोई कदम उठाता है, किंतु बाद में वही कदम उसके लिए एक नई और गंभीर समस्या बन जाता है। अमरू द्वारा बिल्ली को बोरी में बंद कर ले जाने और उस पर बच्चे चुराने के संदेह का दृश्य अत्यंत हास्योत्पादक बन पड़ा है।
लेखक के घर में चूहों का भारी उपद्रव था जो अनाज, किताबें और कपड़े कुतर डालते थे। चूहों से मुक्ति पाने के लिए मित्रों की सलाह पर बिल्ली पाली गई थी।
अमरू बिल्ली को बोरी में भरकर छोड़ने जा रहा था। रास्ते में एक आदमी ने शोर मचा दिया कि वह बोरी में बच्चा चुराकर भाग रहा है। इसी गलतफहमी में लोगों की भीड़ ने उसे घेर लिया था।
थानेदार के सामने जब अमरू ने बोरी का मुँह खोला, तो उसमें से बच्चा निकलने के बजाय एक बिल्ली छलाँग मारकर बाहर निकल भागी, जिससे सभी लोग हँसी के पात्र बन गए।