ऊँट से नीचे उतरने के बाद लेखिका की हालत बड़ी अजीब हो गई थी। उनके पैर सीधे नहीं हो पा रहे थे, चलने में अत्यधिक कठिनाई महसूस हो रही थी और शरीर के निचले भाग तथा कमर में भारी दर्द होने लगा था।
"ऊँट पर बैठकर दूर-दूर तक फैले मखमली सुनहरे रेत के टीलों को देखना और उसकी मंद-मंद हिलोरें लेती चाल पर चलना बड़ा ही रोमांचक, विलक्षण और मनोरंजक अनुभव था।"
| स्तंभ 'अ' | स्तंभ 'ब' (सही उत्तर) |
|---|---|
| १. रेगिस्तान का जहाज | ऊँट |
| २. मखमली गद्दे | रेत (रेत के टीले) |
| ३. रंग-बिरंगी पोशाक | पर्यटक |
| ४. पर्यटकों की मंजिल | सूर्यास्त केंद्र बिंदु (सनसेट पॉइंट) |
| शब्द | संधि विग्रह | ध्वनि परिवर्तन | संधि का प्रकार |
|---|---|---|---|
| रेखांकित | रेखा + अंकित | आ + अ = आ | स्वर संधि |
| स्वागत | सु + आगत | उ + आ = वा | स्वर संधि |
| सूर्यास्त | सूर्य + अस्त | अ + अ = आ | स्वर संधि |
| मनोहर | मनः + हर | अः + ह = ओ | विसर्ग संधि |
| वाङ्मय | वाक् + मय | क् + म = ङ् | व्यंजन संधि |
| सम्मान | सत् + मान (सम् + मान) | त् / म् + म = म्म | व्यंजन संधि |
"साँस चलती है - तुझे चलना पड़ेगा ही मुसाफिर!" पर्यटन और यात्राएँ मनुष्य के जीवन को आनंद, स्फूर्ति और नया अनुभव प्रदान करती हैं। यात्रा केवल मनोरंजन का ही साधन नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष ज्ञानवर्धन और चरित्र निर्माण का एक सशक्त माध्यम है।
गत दीपोत्सव की छुट्टियों में मुझे अपने परिवार के साथ राजस्थान के ऐतिहासिक दुर्गों और सांस्कृतिक स्थलों की यात्रा करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। हमने जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर के प्रसिद्ध किलों का भ्रमण किया। जैसलमेर का 'सोनार किला' (स्वर्ण दुर्ग) पीले पत्थरों से बना ऐसा अद्भुत दुर्ग है, जो सूर्य की किरणों में सोने की भाँति चमकता है। वहाँ की बारीक नक्काशीदार हवेलियाँ (पटवों की हवेली) और थार मरुस्थल की सुनहरी रेत पर ऊँट की सवारी का अनुभव अत्यंत रोमांचक और अविस्मरणीय था।
रेगिस्तान में सूर्यास्त (सनसेट) का मनोहारी दृश्य और रात को लोक-कलाकारों का कालबेलिया नृत्य देखकर भारतीय संस्कृति की भव्यता पर गर्व हुआ। इस ऐतिहासिक सैर ने हमें इतिहास के गौरवशाली पन्नों से परिचित कराया। सचमुच, यात्राएँ व्यक्ति के दृष्टिकोण को व्यापक और विचारशील बनाती हैं।
सुप्रसिद्ध लेखिका रुक्मिणी वर्मा द्वारा रचित 'वीरभूमि पर कुछ दिन' एक अत्यंत जीवंत और चित्ताकर्षक यात्रा वर्णन है। इसमें लेखिका ने राजस्थान की वीरभूमि जैसलमेर के ऐतिहासिक किलों, बारीक नक्काशी वाली हवेलियों, थार मरुस्थल के मखमली सुनहरे रेत के टीलों, ऊँट की सवारी के रोमांच और राजस्थानी लोकसंस्कृति का अत्यंत सुंदर, प्रामाणिक और भावपूर्ण वर्णन प्रस्तुत किया है।
जैसलमेर के किले, हवेलियाँ और भवन पीले पत्थरों से बने हैं, जिन पर जब सूर्य की किरणें पड़ती हैं, तो पूरा शहर सोने जैसा चमकता है, इसलिए इसे स्वर्ण नगरी कहा जाता है।
ऊँट को रेगिस्तान का जहाज कहा जाता है, क्योंकि उसके चौड़े गद्देदार पैर रेत में धँसते नहीं हैं और वह कई दिनों तक बिना पानी पिए मरुस्थल में यात्रा कर सकता है।
दो वर्णों (ध्वनियों) के अत्यंत निकट आने पर उनमें जो विकार या परिवर्तन उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं। संधि के तीन मुख्य प्रकार हैं - स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि।