दूसरी इकाई | पाठ ७ : शिष्‍टाचार

पूरक पठन - कहानी - भीष्म साहनी (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए: संजाल पूर्ण कीजिए:
(अ) संजाल : गद्यांश में 'हेतू' (नौकर) की बताई गई विशेषताएँ:
उत्तर :
१. अरूप (साधारण व बेडौल रूप)
२. उजड्ड (अक्खड़ व्यवहार)
↑ ↑
गद्यांश में हेतू की विशेषताएँ
↓ ↓
३. गँवार (तौर-तरीकों से अनभिज्ञ)
४. मोटे-मोटे स्थूल हाथ
(आ) संजाल : श्रीमती जी की नौकरों के प्रति विशेषताएँ/विचार:
उत्तर :
१. गुस्सैल स्वभाववाली
२. अविश्वासी (सदा संदेह करने वाली)
↑ ↑
श्रीमती जी की विशेषताएँ
↓ ↓
३. संवेदनहीन एवं कठोर
४. नौकरों के प्रति हीन विचार रखने वाली
Q2) विधानों के सामने दी गई चौखट में सत्य / असत्य लिखिए:
उत्तर :
१. अगले दिन श्रीमती ने अपना ट्रंक खोलकर चीज़ों की पड़ताल शुरू कर दी। [सत्य]
२. सहसा हेतू की आँखों में आँसू आ गए। [सत्य]
Q3) कारण लिखिए:
उत्तर :
१. रामगोपाल जी की नौकरों की खोज शिथिल हुई, क्योंकि :

हेतू के आ जाने से घर के सभी काम ठीक से होने लगे और परिवार के दिन शांति से कटने लगे थे।

२. हेतू की तनख्वाह से कटौती होती थी, क्योंकि :

काम करते समय हेतू के स्थूल हाथों से कभी-कभी काँच व चीनी के बर्तन टूट जाते थे और श्रीमती नुकसान की भरपाई उसकी पगार से करती थीं।

Q4) ऐसे दो प्रश्न तैयार कीजिए कि जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों:
उत्तर :

१. उत्तर शब्द : 'बरखास्त'
• निर्मित प्रश्न : श्रीमती दिन में दस बार हेतू को नौकरी से क्या करने की धमकी देती थीं?

२. उत्तर शब्द : 'हेतू'
• निर्मित प्रश्न : रामगोपाल जी के घर में काम करने वाला उजड्ड, गँवार और अरूप नौकर कौन था?

Q5) मौलिक सृजन: निम्नलिखित मुद्दों का उचित क्रम लगाकर उनके आधार पर कहानी लेखन कीजिए, शीर्षक दीजिए और सीख भी लिखिए:
दिए गए मुद्दे : एक लड़का — शहर के महाविद्यालय में पढ़ना — छुट्टियों में गाँव आना — प्रति वर्ष सूखे की समस्या का सामना — मन में निश्चय — कुआँ खोदने का प्रारंभ — लोगों का हँसना — एक मित्र का साथ देना — लोगों का जुड़ना — कुआँ तैयार होना — कुआँ पानी से भरना — लोगों का खुश होना — सीख व शीर्षक।
उत्तर :

शीर्षक : एकता में ही शक्ति है (संकल्प का फल)

रामपुर गाँव में रहने वाला तेनाली एक होनहार और विचारशील युवक था। वह उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए शहर के एक बड़े महाविद्यालय में पढ़ रहा था और भविष्य में अभियंता (इंजीनियर) बनकर अपने गाँव की सेवा करना चाहता था। वह प्रत्येक वर्ष गर्मियों की छुट्टियों में अपने गाँव आता था।

रामपुर गाँव में वर्षा बहुत कम होती थी, जिसके कारण प्रतिवर्ष ग्रामीणों को भीषण सूखे और पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता था। पीने के पानी के लिए गाँव की स्त्रियों को मीलों दूर भटकना पड़ता था। इस वर्ष जब तेनाली गाँव आया, तो उसने गाँव के जल संकट को हमेशा के लिए समाप्त करने का दृढ़ निश्चय किया।

उसने ग्राम चौपाल में ग्रामीणों से मिलकर श्रमदान द्वारा एक विशाल साझा कुआँ खोदने का प्रस्ताव रखा। किंतु अकर्मण्य और निराशावादी ग्रामीणों ने उसका साथ देने के बजाय उसका उपहास उड़ाया और उस पर हँसने लगे। तेनाली निराश नहीं हुआ। उसने फावड़ा और तगाड़ी उठाई और अकेले ही बंजर जमीन पर कुआँ खोदना प्रारंभ कर दिया।

तेनाली के अटूट संकल्प और पसीने को देखकर उसके सहपाठी मित्र गोपाल का हृदय द्रवित हुआ और उसने आगे बढ़कर उसका साथ देना शुरू किया। दो युवाओं को भीषण धूप में गाँव की भलाई के लिए जूझते देखकर धीरे-धीरे अन्य ग्रामीणों की आँखें खुलीं। पहले कुछ युवा, फिर किसान और देखते-ही-देखते पूरा गाँव कुआँ खोदने के अभियान में जुड़ गया।

सभी ग्रामीणों के सम्मिलित श्रम से कुछ ही सप्ताहों में एक गहरा और पक्का कुआँ तैयार हो गया। आषाढ़ का महीना आया और आकाश में घने काले मेघ घिर आए। झमाझम वर्षा से नव-निर्मित कुआँ शीतल और मीठे पानी से लबालब भर गया। वर्षों से पानी की बूँद-बूँद को तरसने वाले ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। पूरे गाँव में उत्सव का माहौल बन गया।

सीख : 'एकता में ही बल है।' यदि दृढ़ संकल्प के साथ मिल-जुलकर प्रयास किया जाए, तो कठिन-से-कठिन कार्य और बड़ी-से-बड़ी समस्या का समाधान संभव हो जाता है।
Q6) भाषा बिंदु: दिए गए अव्यय भेदों के अनुसार पाठ से खोजकर दो-दो वाक्य लिखिए:
उत्तर :
१. क्रियाविशेषण अव्यय
  1. श्रीमती जल्दी ही थककर बैठ गईं।
  2. गाँव का भोला धीरे-धीरे एक शहरी नौकर में तब्दील होने लगा।
२. समुच्चयबोधक अव्यय
  1. पलंग पर बैठे-बैठे उन्होंने नौकर को सिर से पाँव तक देखा और देखते ही मुँह फेर लिया।
  2. श्रीमान और श्रीमती के घर के सामने बाजे बजने लगे।
३. संबंधबोधक अव्यय
  1. श्रीमती का व्यवहार नौकरों के साथ नौकरों का-सा ही था।
  2. थोड़ी देर तक चुपचाप खड़े उसके मुँह की ओर देखते हैं।
४. विस्मयादिबोधक अव्यय
  1. अच्छा! क्या बात है?
  2. केवल बारह रूपए!
Q7) स्वमत अभिव्यक्ति: 'नौकर और मालिक के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध होने चाहिए' स्पष्ट कीजिए:
उत्तर :

सभ्य समाज में प्रत्येक मनुष्य को आत्मसम्मान के साथ जीने का अधिकार है, चाहे वह अमीर हो या गरीब, मालिक हो या घरेलू नौकर। नौकर अपनी विवशता और परिवार के भरण-पोषण के लिए श्रम बेचता है, अपना आत्मसम्मान नहीं। अतः मालिक का यह मानवीय कर्तव्य है कि वह नौकर के प्रति क्रूरता या दुर्व्यवहार न करे, बल्कि उसके साथ आत्मीयता, सम्मान और सहानुभूति का व्यवहार रखे।

प्रस्तुत कहानी में भीष्म साहनी जी ने उच्च-मध्यम वर्ग के तथाकथित 'शिष्टाचार' के खोखलेपन को उजागर किया है। बाहर के मेहमानों के सामने शिष्टाचार का ढोंग करने वाले बाबूजी जब अपने घरेलू नौकर हेतू को भरी महफिल में थप्पड़ मारते हैं, तो उनकी संवेदनहीनता प्रकट हो जाती है। मालिक को समझना चाहिए कि सौहार्द, अपनत्व और विश्वास से ही नौकर सच्चा व निष्ठावान बनता है।

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पाठ परिचय : शिष्‍टाचार (भीष्म साहनी)

महान कथाकार भीष्म साहनी द्वारा लिखित 'शिष्टाचार' एक अत्यंत मार्मिक और यथार्थवादी सामाजिक कहानी (पूरक पठन) है। यह कहानी आधुनिक शिक्षित वर्ग के बनावटी शिष्टाचार, संवेदनहीनता और वर्ग-भेद की मानसिकता पर गहरा प्रहार करती है। नौकर हेतू के सरल और संवेदनशील मन तथा मालिक-मालकिन के कठोर व्यवहार का मनोवैज्ञानिक द्वंद्व पाठकों को झकझोर कर रख देता है।

कहानी के प्रमुख जीवन-मूल्य एवं सीख

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. हेतू अपने घर (गाँव) क्यों जाना चाहता था?

हेतू को गाँव से समाचार मिला था कि उसकी माँ गंभीर रूप से बीमार है; अतः वह अपनी माँ की देखरेख करने हेतु छुट्टी माँग रहा था।

२. भीष्म साहनी जी ने इस कहानी में क्या व्यंग्य किया है?

लेखक ने यह व्यंग्य किया है कि संपन्न वर्ग बाहर के लोगों से तो अत्यंत मीठा और शिष्ट व्यवहार करता है, किंतु अपने ही घर के गरीब नौकरों के प्रति क्रूर, अमानवीय और संवेदनहीन बन जाता है।

३. अव्यय के प्रमुख भेद कौन-कौन से हैं?

अव्यय (अविकारी शब्द) के मुख्य चार भेद होते हैं: क्रियाविशेषण अव्यय, संबंधबोधक अव्यय, समुच्चयबोधक अव्यय और विस्मयादिबोधक अव्यय।

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