जीवन में आने वाली विकट विपत्तियाँ, संकट, अज्ञान तथा प्रतिकूल परिस्थितियाँ।
जो व्यक्ति वास्तव में आदर, सम्मान और सद्गुणों का सच्चा अधिकारी होता है; उसे माँगने की आवश्यकता नहीं होती।
प्रस्तुत शेरों में गजलकार चंद्रसेन 'विराट' जी मनुष्य को स्वाभिमान, आत्मबल और यथार्थवादी सोच अपनाने का संदेश देते हैं। कवि कहते हैं कि विपत्तियों और संकटों के अँधेरे समय में किसी दूसरे से दया या सहायता की भीख नहीं माँगनी चाहिए, बल्कि अपने आत्मबल से संकटों का सामना करना चाहिए। काँटों के घने जंगल में कभी कोमल पुष्पों की आशा नहीं की जा सकती; अर्थात् विकट परिस्थितियों में संघर्ष ही एकमात्र रास्ता है।
इसी प्रकार, जो मनुष्य अपने चरित्र, ज्ञान, परोपकार और श्रेष्ठ कर्मों से समाज में आदर का सच्चा अधिकारी बन जाता है, लोग उसके समक्ष स्वतः ही श्रद्धा से नतमस्तक हो जाते हैं। स्वाभिमानी और योग्य व्यक्ति को किसी के आगे हाथ फैलाकर सम्मान माँगने की कभी आवश्यकता नहीं पड़ती।
गजल 'उड़ान' का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को अपने जीवन में स्वाभिमान, अटूट आत्मबल, बुलंद हौसले और विनम्रता जैसे मानवीय गुणों को अंगीकार करना चाहिए। जिनके पंखों में शक्ति और हृदय में दृढ़ विश्वास होता है, वे बिना किसी सहारे के अपनी मंजिल रूपी विस्तृत गगन को नाप लेते हैं। व्यक्ति को अपनी आंतरिक क्षमता पर विश्वास रखना चाहिए और समाज में सुगंध बिखेरने वाले धूपदान की भाँति परोपकारी जीवन जीना चाहिए।
| विरामचिह्न | चिह्न का नाम | स्वतंत्र वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|
| , | अल्पविराम | बाजार से मोहन ने आम, सेब, केले और अंगूर खरीदे। |
| । | पूर्णविराम | सत्य और परिश्रम से ही मनुष्य सफलता के शिखर पर पहुँचता है। |
| ? | प्रश्नवाचक चिह्न | क्या तुमने आज का स्वाध्याय पूर्ण कर लिया है? |
| ! | विस्मयादिबोधक चिह्न | अरे! पर्वत की चोटियों पर कितना मनोहारी दृश्य है! |
"पंछी बनूँ उड़ती फिरूँ मस्त गगन में..." हाँ, मैं एक नन्ही गौरैया चिड़िया हूँ। मेरा संसार यह नीला खुला आसमान, हरे-भरे सघन वृक्ष और कल-कल बहते शीतल झरने हैं। मैं तिनका-तिनका जोड़कर बड़े परिश्रम और स्नेह से अपने बच्चों के लिए घोंसला बनाती हूँ। प्रातःकाल की प्रथम किरण के साथ मैं अपनी मीठी चहचहाहट से संसार को जगाती हूँ।
किंतु आज का मानव अत्यंत स्वार्थी हो गया है। उसने कंक्रीट के जंगल बनाने के लिए पेड़ों को काट डाला और वायुमंडल को प्रदूषण व मोबाइल टावरों के विषैले विकिरण से भर दिया। हमारे पीने के लिए न स्वच्छ जल बचा है और न खाने को सुरक्षित दाना। हमारे अनेक साथी असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं। हे मानव! यह सुंदर धरा हम सबकी साझा धरोहर है। वृक्ष लगाओ, हमें भी स्वच्छंद जीने दो; क्योंकि 'जिओ और जीने दो' ही इस प्रकृति का शाश्वत नियम है।
'उड़ान' आधुनिक हिंदी गजल के विख्यात हस्ताक्षर चंद्रसेन 'विराट' द्वारा रचित एक प्रेरक और विचारोत्तेजक गजल है। इस गजल में सरल और प्रवाहपूर्ण भाषा में जीवन के उच्च आदर्शों, स्वाभिमान, आत्मविश्वास, विनम्रता और कर्मठता का उद्घोष किया गया है। कवि स्पष्ट करते हैं कि जिनके पंखों में साहस और लगन की शक्ति होती है, वे अपनी मंजिल स्वयं प्राप्त कर लेते हैं।
इसका आशय है कि यदि व्यक्ति के पास साहस, सामर्थ्य और बुलंद हौसले हों, तो वह बिना किसी बाहरी सहारे के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
गजल के प्रथम शेर को 'मतला' और अंतिम शेर (जिसमें कवि का उपनाम आता है) को 'मकता' कहा जाता है।
कवि ने सच्चे शायर और परोपकारी मनुष्य की तुलना धूपदान से की है, जो स्वयं जलकर भी समूचे परिवेश को अपनी सुगंध से महका देता है।