दूसरी इकाई | पाठ ९ : मेरे पिता जी

पूरक पठन (आत्मकथा) - डॉ. हरिवंशराय बच्चन (स्वाध्याय प्रश्न उत्तर)

Q1) निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
(१) कारण लिखिए:
  1. विमान के प्रति लेखक का आकर्षित होना:
    उत्तर : दो विमान लेखक को अपनी ओर बार-बार खींच रहे थे। मानो वे उसे सीमाओं के परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी दे रहे थे और मानो वे उसके सपनों को पंख लगा रहे थे।
  2. लेखक का एयरोनॉटिकल इंजिनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना:
    उत्तर : लेखक का एयरोनॉटिकल इंजिनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना; क्योंकि वे बचपन से ही आकाश में ऊँची उड़ान भरने के प्रति अत्यंत आकर्षित थे।
(२) स्वमत अभिव्यक्ति: 'मेरी अभिलाषा' विषय पर छह से आठ पंक्तियाँ लिखिए:
उत्तर :

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में कोई न कोई ध्येय अथवा अभिलाषा अवश्य होती है, जो उसे प्रगति पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। मेरी सबसे बड़ी अभिलाषा एक सच्चा और समर्पित वैज्ञानिक बनकर देश की सेवा करने की है। मैं विज्ञान और तकनीकी अनुसंधान के क्षेत्र में नए-नए शोध और आविष्कार करके भारत का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित करना चाहता हूँ।

विज्ञान का उपयोग मैं मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सुगम बनाने के लिए करना चाहता हूँ। इसके साथ ही, मैं देश के ग्रामीण और निर्धन बालकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण जाग्रत करना चाहता हूँ। अपनी इस पावन अभिलाषा को सिद्ध करने के लिए मैं आज से ही लगन, निष्ठा और कठोर परिश्रम से अध्ययन में जुटा हुआ हूँ।

Q2) संजाल पूर्ण कीजिए: परिच्छेद में प्रयुक्त भाषाएँ और बोलियाँ:
१. संस्कृत
२. उर्दू
↑ ↑
परिच्छेद में प्रयुक्त भाषाएँ और बोलियाँ
↓ ↓
३. अवधी
४. ब्रज / खड़ी बोली
Q3) स्वमत अभिव्यक्ति: 'अपना व्यक्तित्व समृद्ध करने के लिए अलग-अलग भाषाओं का ज्ञान उपयुक्त होता है' - अपने विचार लिखिए:
उत्तर :

भाषा केवल भावों और विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम ही नहीं है, अपितु वह ज्ञान, संस्कृति और मानवीय अनुभूतियों की कुंजी है। जब हम अपनी मातृभाषा के अतिरिक्त अन्य देशी और विदेशी भाषाएँ सीखते हैं, तो हमारे ज्ञान और चिंतन का क्षितिज विस्तृत हो जाता है। बहुभाषी व्यक्ति समाज में सहजता से संवाद स्थापित कर लेता है और उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है।

विभिन्न भाषाओं के अध्ययन से हमें भिन्न-भिन्न संस्कृतियों, इतिहास और लोकजीवन की गहन समझ प्राप्त होती है। अन्य भाषा-भाषी लोगों के बीच हमें आदर और अपनत्व मिलता है। इसके साथ ही, आज के वैश्वीकरण के दौर में बहुभाषी ज्ञान रोजगार, उच्च शिक्षा, पर्यटन और वैश्विक व्यापार के नए मार्ग प्रशस्त करता है। अतः निःसंदेह अनेक भाषाओं का ज्ञान व्यक्तित्व को बहुमुखी, समृद्ध और प्रभावशाली बनाता है।

Q4) पाठ के आँगन में:
(क) निम्नलिखित शब्दों को पढ़कर उनके लिए पाठ में प्रयुक्त विशेषताएँ लिखिए:
शब्द पाठ में प्रयुक्त विशेषता
जूता काला
पाजामा ढीला
शरीर लंबा व इकहरा
टोपी दुपल्ली
(ख) 'संयुक्त परिवार' संबंधी अपने विचार लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए:
उत्तर :

संयुक्त परिवार भारतीय संस्कृति, संस्कारों और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार स्तंभ है। इस व्यवस्था में दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची और सभी भाई-बहन एक ही छत के नीचे परस्पर प्रेम, सौहार्द और सहयोग से निवास करते हैं। घर के बड़े-बुजुर्गों का स्नेह, संरक्षण और मार्गदर्शन परिवार के बच्चों को उच्च नैतिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादाओं का पाठ पढ़ाता है।

संयुक्त परिवार में सुख और दुख मिलकर बाँटे जाते हैं, जिससे कठिन से कठिन विपत्ति का सामना भी परिवार सरलता से कर लेता है। यद्यपि आधुनिक युग की भागदौड़ और स्वार्थपरकता के कारण एकल परिवारों का चलन बढ़ रहा है, किंतु संयुक्त परिवार से मिलने वाली मानसिक शांति, सुरक्षा, एकाकीपन से मुक्ति और संस्कार आज भी अमूल्य हैं। यह व्यवस्था हमें त्याग, सहनशीलता और परस्पर समरसता सिखाती है।

Q5) भाषा बिंदु: विरामचिह्न पढ़िए, समझिए और उनके प्रकार तथा उदाहरण लिखिए:
विरामचिह्नों के प्रमुख प्रकार, उनकी परिभाषा और पाठ्यपुस्तक के अनुसार उदाहरण:

१. स्थान सूचक चिह्न

...

परिभाषा : यह चिह्न सूचियों में खाली स्थान भरने अथवा रिक्तता दर्शाने के काम आता है।

उदाहरण : (१) लेख - कविता... (२) बाबू मैथिलीशरण गुप्त...

२. अपूर्ण सूचक चिह्न

XXX

परिभाषा : किसी लेख में से जब कोई अंश छोड़ दिया जाता है, तब इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण : तुम समझते हो कि यह बालक है। XXX गाँव के बाजार में वह सब्जी बेचा करता था।

३. संक्षेप सूचक (लाघव चिह्न)

.

परिभाषा : किसी संज्ञा अथवा शब्द को संक्षिप्त रूप में लिखने के लिए इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण : डॉ. (डाक्टर), पं. (पंडित), कृ.पृ.उ. (कृपया पृष्ठ उलटिए)।

४. समाप्ति सूचक चिह्न

-०-

परिभाषा : बहुधा किसी लेख, अध्याय अथवा पुस्तक की पूर्ण समाप्ति पर इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण : इस तरह राजा और रानी सुख से रहने लगे। -०-

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पाठ परिचय : मेरे पिता जी (डॉ. हरिवंशराय बच्चन)

'मेरे पिता जी' विख्यात कवि व लेखक डॉ. हरिवंशराय बच्चन की प्रसिद्ध आत्मकथा 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' का एक अत्यंत मार्मिक और आत्मीय अंश है। इस पाठ में बच्चन जी ने अपने पिता बाबू प्रताप नारायण श्रीवास्तव के सादगीपूर्ण जीवन, समय की कठोर पाबंदी, कर्तव्यनिष्ठा, स्वाभिमान, धार्मिक आचरण और सांप्रदायिक सद्भाव का सजीव व प्रभावशाली चित्रण किया है।

पाठ के प्रमुख जीवन-मूल्य एवं सीख

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. लेखक के पिता जी का दफ्तर में सहकर्मियों के बीच क्या स्थान था?

वे अपनी शुद्ध लिखावट, समय की पाबंदी, हिसाब-किताब की स्वच्छता और सहकर्मियों के पिछड़े काम को देर रात तक निस्वार्थ भाव से करने के कारण सबके अत्यंत प्रिय और आदरणीय थे।

२. लेखक की माँ ने आराम घड़ी के विषय में क्या कहा था?

लेखक की माँ ने अवधी बोली में चुटकी लेते हुए कहा था कि "नाम तो एकर आराम घड़ी है। पर न ई खुद आराम करत है न केहू क आराम करै देत है!" क्योंकि वह हर घंटे जोर-जोर से घंटी बजाती थी।

३. पिता जी मौन रहकर गीता का पाठ क्यों करते थे?

क्योंकि पिता जी गीता के दार्शनिक और आध्यात्मिक विचारों पर गहराई से चिंतन-मनन करना चाहते थे, इसलिए वे मौन रहकर एकाग्रचित्त होकर गीता पढ़ते थे।

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